श्रावण की शिवरात्रि 2020 : जानें शिव पूजा विधि और जलाभिषेक मुहूर्त सहित मंत्र और महत्व

हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन को मासिक शिवरात्रि...

By: दीपेश तिवारी

Published: 18 Jul 2020, 01:28 PM IST

शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित त्यौहार है। इस दौरान भगवान शिव, माता पार्वती, नंदी, गणेश भगवान, कार्तिकेय भगवान की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। सावन शिवरात्रि का दिन कांवड़ यात्रा का समापन दिन भी माना जाता है।

हिंदू पंचाग के अनुसार हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इसमें भी फाल्गुन और श्रावण मास की शिवरात्रि को विशेष फलदायी माना जाता है। इस बार श्रावण मास की शिवरात्रि 19 जुलाई, 2020 रविवार के दिन मनायी जाएगी।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार 19 जुलाई 2020 को मासिक शिवरात्रि है। सवान मास में इस शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। सावन मास में शिव की पूजा करने से बाधाएं समाप्त होती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है।

मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान शिव पृथ्वी का भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों की खबर लेते हैं। उनके कष्टों को दूर करते हैं और अपना आर्शीवाद प्रदान करते हैं। इसलिए सावन में पड़ने वाले सोमवार पर भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।


शिव पूजा और जलाभिषेक मुहूर्त...
जलाभिषेक मुहूर्त: 19 जुलाई, सूर्योदय के पश्चात् 5:35:24 से दोपहर 2:45 तक

ज्ञात हो कि शिव पूजा के लिए आर्द्रा नक्षत्र और मिथुन लग्न विशेष रूप से शुभ माना गया है।

प्रातः 5 बजकर 40 मिनट से 8 बजकर 25 मिनट तक (सुबह 7:52 तक मिथुन लग्न विशेष शुभ)
19 बजकर 28 मिनट से 21 बजकर 30 मिनट तक (प्रदोषकाल )
सांयकाल 21:30 से 23:33 (निशीथकाल)
रात्रि : 23:33 से 24:10 तक ( महानिशीथ एवम चतुर्दशी में )

मासिक शिवरात्रि का महत्व
सावन में मासिक शिवरात्रि का महत्व महाशिवरात्रि के महत्व से कम नहीं है। इस शिवरात्रि पर विधि पूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव की पूजा की जाती है।

मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, क्योंकि इस व्रत में व्यक्ति को अपने अवगुणों का त्याग करना होता है। शिव ही सत्य है, इसलिए जो व्यक्ति बुराई, लालच, और गलत कामों से दूर रहता है उसे भगवान शिव का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

भगवान शिव का सबसे पवित्र दिन शिवरात्रि, भगवान शिव की प्रसन्नता हासिल करने के साथ-साथ, सकारात्मक उर्जा का एक सर्वश्रेष्ठ श्रोत माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन की पूजा करने से, भगवान शिव पर जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करने मात्र से जीवन में शांति आती है, और कितनी भी कठिन राहें हो वो आसान लगने लग जाती है। इसके अलावा शिवरात्रि का व्रत-पूजन करने से मनचाहा वर भी मिलता है और समस्त मनोकामनाएं भी अवश्य पूरी होती हैं।

इन मंत्रों का करें प्रयोग...
नमः शिवायः, ॐ नमः शिवायः।।

ॐ नमः शिवायः।।
बोल बम, बम बम, बम बम भोले।।
हर हर महादेव।।

श्रावण शिवरात्रि पूजा की विधि...
: इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ कपड़े पहनें।
: इसके बाद व्रत करना हो तो पूजा-व्रत का संकल्प लें।
: फिर घर के मंदिर में शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएं। (दूध, दही, शहद, घी और गन्‍ने का रस या चीनी का मिश्रण से पंचामृत बनाएं)
: इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग पर बेलपत्र, फल, फूल इत्यादि अर्पित करें।
: शिव चालीसा का पाठ करें या सुनें, और अंत में घर के सभी लोग मिलकर भगवान की आरती करें।

पंडित शर्मा के अनुसार इसके अलावा मान्यता है कि आप इस दिन की पूजा में कुछ उपाय करके अपनी मनोकामनाएं भी पूरी कर सकते हैं। जैसे...

: पाप को नाश करने के लिए इस दिन की पूजा के दौरान भगवान शिव को तिल का तेल चढ़ाएं। इससे आपके समस्त पाप अवश्य नष्ट हो जायेंगे।
: ऐसे ही अगर किसी कन्या को मनचाहे वर की आस हो तो, इस दिन भगवान शिव को चने की दाल का भोग लगाने की सलाह दी जाती है।
: यदि घर में सुख-शांति और समृद्धि चाहते हैं तो, भगवान शिव पर धतूरे का फूल या फल का भोग लगाएं।
: इसके अलावा कोई कानूनी कार्यवाही जीतनी हो या अपने शत्रुओं पर जीत हासिल करनी हो तो, इस दिन भगवान शिव को भांग चढ़ाएं। आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी।
: यदि आपका मन शांत नहीं रहता है या आप बुरे विचारों से घिरे रहते हैं, तो इस दिन पंचमुखी रुद्राक्ष की माला लेकर ऊं नम: शिवाय का जाप करें।

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दीपेश तिवारी
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