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नृसिंह जयंती 2020 : भय, अकाल मृत्यु का डर, असाध्य रोग से मिलेगा छुटकारा, करें इस पावरफुल मंत्र का जप

नृसिंह भगवान के सिद्ध मंत्र जप एवं पूजा विधि।

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भोपाल

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Shyam Kishor

May 05, 2020

नृसिंह जयंती 2020 : भय, अकाल मृत्यु का डर, असाध्य रोग से मिलेगा छुटकारा, करें इस पावरफुल मंत्र का जप

नृसिंह जयंती 2020 : भय, अकाल मृत्यु का डर, असाध्य रोग से मिलेगा छुटकारा, करें इस पावरफुल मंत्र का जप

हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को भगवान विष्णु के नृसिंह भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाता है। 6 मई 2020 दिन बुधवार को भगवान नृसिंह की जयंती मनाई जाएगी। इस शुभ दिन नृसिंह भगवान के इस मंत्र का करने से मनुष्य को शत्रु भय, अकाल मृत्यु का डर, असाध्य रोगों आदि छुटकारा मिलने लगता है। जानें नृसिंह भगवान के सिद्ध मंत्र जप एवं पूजा विधि।

नृसिंह जयंती : भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की अद्भुत कथा

नृसिंह मंत्र से तंत्र मंत्र बाधा, भूत पिशाच भय, अकाल मृत्यु का डर, असाध्य रोग आदि से छुटकारा मिलता है तथा जीवन में शांति की प्राप्ति हो जाती है।

भगवान नृसिंह के बीज मंत्र।

।। ॐ श्रौं’क्ष्रौं ।।

।। ॐ श्री लक्ष्मीनृसिंहाय नम:।।

चमत्कारी नृसिंह मंत्र

शत्रु बाधा हो या तंत्र मंत्र बाधा, भय हो या अकाल मृत्यु का डर। इस मंत्र के जप करने से शांति हो जाती है। शत्रु निस्तेज होकर भाग जाते हैं, भूत पिशाच भाग जाते हैं तथा असाध्य रोग भी ठीक होने लगता है। भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार का तांत्रिक मंत्र- "ॐकार नृसिंह" मंत्र के जप से तांत्रिक क्रिया का तंत्र प्रभाव 7 दिन में खत्म हो जाता है।

पूजन विधि व शुभ मुहूर्त

- इस दिन पूजा करने के लिए सबसे उत्तम समय गोधूली बेला (संध्या काल) माना गया है, क्योंकि इसी समय भगवान नृसिंह ने अवतार लिया था।

- इस दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए।

- भगवान नृसिंह तथा लक्ष्मीजी की मूर्ति स्थापित करना चाहिए।

- भगवान नृसिंह जयंती के दिन व्रत-उपवास रखकर विधि विधान से विशेष पूजा अर्चना करना चाहिए।

- भगवान नृसिंह का वेदमंत्रों से आवाहन् कर प्राण-प्रतिष्ठा करने के बाद षोडशोपचार से पूजन करना चाहिये।

- भगवान नरसिंह जी का ऋतुफल, पुष्प, पंचमेवा, कुमकुम केसर, नारियल, अक्षत, पीताम्बर, गंगाजल, काले तिल, पञ्चगव्य आदि से पूजन करने के बाद हवन सामग्री से हवन भी करना चाहिए।

उपरोक्त विधि से पूजा करने के बाद एकांत में कुश के आसन पर बैठकर रुद्राक्ष की माला से इस नृसिंह भगवान जी के मंत्र का जप करना चाहिए।

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