पुरी जगन्‍नाथ मंदिर और रथयात्रा के दर्शन मात्र से मिलता है चारों धाम की तीर्थयात्रा का फल

Jagannath temple and rath yatra के दर्शन मात्र से हो जाती है हर मनोकामना पूरी

By: Shyam

Published: 04 Jul 2019, 12:36 PM IST

आज भगवान जगन्नाथ के पावन धाम पुरी से भव्य और विशाल रथयात्रा निकाली जा रही है। इतिहास में उल्लेख मिलता है कि पुरी के जगन्नाथ मंदिर का भव्‍य निर्माण 7 वीं सदी में लगभग 1000 साल से भी पहले किया गया था। दस दिन तक चलने वाली रथयात्रा के एवं पुरी के जगन्नाथ मंदिर के दर्शन मात्र से चार धामों की यात्रा करने के बराबर फल मिलता है। भगवान श्री जगन्‍नाथ का मंदिर पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान श्री जगन्‍नाथ के साथ उनके बड़े भाई भगवान बलराम जी और उनकी बहन देवी सुभद्रा जी की भव्य और मनमोहक मूर्ति विराजमान है।

 

 

puri Jagannath temple and rath yatra

भगवान जगन्‍नाथ के मंदिर की मान्यता

ऐसा कहा जाता है कि जब भगवान श्री विष्‍णु चारों धामों की यात्रा पर जाते थे तब वह भारत के उत्‍तराखण्‍ड के चमोली के बद्रीनाथ में स्‍नान करते, गुजरात के द्वारका में वस्‍त्र पहनते हैं, पुरी में भोजन करते और तमिलनाडु रामेश्‍वरम में विश्राम करने बाद श्री भगवान पुरी में निवास करने लगे और कहा जाता है कि तभी से जगन्‍नाथ मंदिर बन गया। जब इस मंदिर का निर्माण हुआ तब अषाड़ महिना ही चल रहा था। इसलिए हर साल अषाड़ (जून-जुलाई) के महीने में भगवान जगन्‍नाथ के मंदिर में विशाल रथयात्रा का आयोजन होने लगा जो आज तक निरतंर जारी है, जिसमें लाखों भक्त शामिल होते हैं।

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पूरे देश में निकलती है रथयात्रा

आषाढ़ शुक्‍ल पक्ष की द्वितीया को पुरी से शुरू होने वाली जगन्‍नाथ रथयात्रा केवल दक्षिण भारत ही नहीं बल्‍कि भारत के अनेक राज्यों सहित दुनिया के कई देशों में भी यह पर्व प्रमुख धार्मिक उत्‍सव के रूप में मनाया जाता है। इस साल 2019 में यह रथयात्रा 4 जुलाई से शुरू हो ही है, जो पूरे 10 दिन तक चलेगी। हर साल होने वाली इस यात्रा में देश दुनिया से लाखों श्रद्धालु भाग लेते हैं।

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इतिहास

1- 1000 साल पुराने इस मंदिर में योगेश्‍वर भगवान श्रीकृष्‍ण जगन्‍नाथ जी रूप में विराजमान है। जगन्नाथ पुरी भारत के चार पवित्र धामों में से एक है।
2- पुरी की जगन्‍नाथ यात्रा में श्रीकृष्‍ण, श्री बलराम जी एवं श्री सुभद्रा देवी जी तीन अलग अलग रथों में विराजमान होते हैं।
3- भगवान जगन्नाथ जी गरुडध्‍वज या नन्‍दीघोष नामक रथ, श्री सुभद्रा जी दर्पदलन नामक रथ एवं श्री बलदाऊ जी पालध्‍वज नामक रथ पर विराजमान होते हैं।
4- इन तीनों रथों को श्रद्धालु भक्त अपने कंधों पर लेकर चलते है। ऐसी मान्यता है कि इन रथों को स्पर्श करने या दर्शन मात्र में मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है।

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