
घायल मालिक की जान बचाने के लिए बाघ से भिड़ गया कुत्ता
सभी ग्रहों में शनिदेव को न्यायाधीश की उपाधि दी गई है। कहा भी जाता है की शनिदेव हर व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार फल देते हैं। इसलिए शनि के नाम पर सभी भयभीत हो जाते हैं। खासकर वे लोग जिन पर शनि की महदशा, शनि की साढ़ेसाती, शनि ढैय्या या शनि की महादशा से पीड़ित हैं। लेकिन ज्योतिषशास्त्र में हर चीज़ का हल है, जिसके अनुसार शनिदेव को प्रकोपों व कष्टों को कम करने के लिए शनि जयंती पर दशरथकृत शनि स्तोत्र करते हैं उन्हें शनि दोषों से जल्द मुक्ति मिलती है और शनिदेव प्रसन्न भी होते हैं। इस पाठ को नियमित रूप से करने से भी लाभ मिलता है। आइए पढ़ते हैं शनि स्त्रोत पाठ...
दशरथकृत शनि स्तोत्र
नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम: ।।
नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते।।
नमो दीर्घायशुष्काय कालदष्ट्र नमोऽस्तुते।।
नमो घोराय रौद्राय भीषणाय कपालिने।।
सूर्यपुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करे भयदाय च।।
नमो मन्दगते तुभ्यं निरिस्त्रणाय नमोऽस्तुते।।
नमो नित्यं क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नम:।।
तुष्टो ददासि वै राज्यं रुष्टो हरसि तत्क्षणात्।।
त्वया विलोकिता: सर्वे नाशंयान्ति समूलत:।।
एवं स्तुतस्तद सौरिग्र्रहराजो महाबल:।।
Updated on:
03 Jun 2019 11:12 am
Published on:
02 Jun 2019 04:34 pm
बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
