शारदीय नवरात्र 2020 : 165 साल बाद बना ये योग, पितृपक्ष से एक माह बाद आएंगी देवी मां

शारदीय नवरात्रि 2020 की शुरुआत (17 अक्टूबर 2020) से...

By: दीपेश तिवारी

Published: 30 Aug 2020, 04:47 PM IST

साल 2020 में अधिकमास के चलते कई त्यौहार देरी से आएंगे। इसी के चलते जहां पितृपक्ष समाप्ति के अगले दिन से ही शारदीय नवरात्रि शुरू हो जाती थीं, वहीं इस बार नवरात्रि पितृ पक्ष की समाप्ति (17 सितंबर 2020 ) से ठीक एक माह बाद शारदीय नवरात्रि 2020 की शुरुआत (17 अक्टूबर 2020) होगी ।

दरअसल इस बार यानि 2020 में श्राद्ध खत्म होने के साथ ही अधिकमास लग जाएगा, इस कारण इसके बाद आने वाले त्यौहारों में देरी होगी। जानकारी के अनुसार करीब 160 साल बाद लीप ईयर और अधिकमास दोनों ही एक साल में हो रहे हैं। चतुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजन पाठ व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान देव सो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागते हैं।

ऐसे समझें वह जो आप जानना चाहते हैं...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार दरअसल हर साल पितृ पक्ष के समापन के अगले दिन से नवरात्र का आरंभ हो जाता है और घट स्‍थापना के साथ 9 दिनों तक नवरात्र की पूजा होती है। यानी पितृ अमावस्‍या के अगले दिन से प्रतिपदा के साथ शारदीय नवरात्र का आरंभ हो जाता है लेकिन ऐसा इस साल नहीं होगा। इस बार श्राद्ध पक्ष समाप्‍त होते ही अधिकमास लग जाएगा। अधिकमास लगने से नवरात्र और पितृपक्ष के बीच एक महीने का अंतर आ जाएगा। आश्विन मास में मलमास लगना और एक महीने के अंतर पर दुर्गा पूजा आरंभ होना ऐसा संयोग करीब 165 साल बाद होने जा रहा है।

लीप वर्ष होने के कारण ऐसा हो रहा है। इसलिए इस बार चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, इस बार पांच महीने का होगा। ज्योतिष की मानें तो 160 साल बाद लीप ईयर और अधिकमास दोनों ही एक साल में हो रहे हैं। ऐसे में चातुर्मास लगने से विवाह, मुंडन, कर्ण छेदन जैसे मांगलिक कार्य नहीं होंगे। इस काल में पूजन पाठ, व्रत उपवास और साधना का विशेष महत्व होता है। इस दौरान देव सो जाते हैं। देवउठनी एकादशी के बाद ही देव जागृत होते हैं।

इस साल 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे। इसके अगले दिन अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। वहीं इसके चलते 17 अक्टूबर से नवरात्रि व्रत रखे जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी। जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन आदि शुरू होंगे।

पंचांग के अनुसार इस साल आश्विन माह का अधिकमास होगा। यानी दो आश्विन मास होंगे। आश्विन मास में श्राद्ध और नवरात्रि, दशहरा जैसे त्योहार होते हैं। अधिकमास लगने के कारण इस बार दशहरा 26 अक्टूबर को दीपावली भी काफी बाद में 14 नवंबर को मनाई जाएगी।

क्‍या होता है अधिक मास...
एक सूर्य वर्ष 365 दिन और करीब 6 घंटे का होता है, जबकि एक चंद्र वर्ष 354 दिनों का माना जाता है। दोनों वर्षों के बीच लगभग 11 दिनों का अंतर होता है। ये अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक माह के बराबर हो जाता है। इसी अंतर को दूर करने के लिए हर तीन साल में एक चंद्र मास अतिरिक्त आता है, जिसे अतिरिक्त होने की वजह से अधिकमास का नाम दिया गया है।

अधिकमास को कुछ स्‍थानों पर मलमास भी कहते हैं। दरअसल इसकी वजह यह है कि इस पूरे महीने में शुभ कार्य वर्जित होते हैं। इस पूरे माह में सूर्य संक्रांति न होने के कारण यह महीना मलिन मान लिया जाता है। इस कारण लोग इसे मलमास भी कहते हैं। मलमास में विवाह, मुंडन, गृहप्रवेश जैसे कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाते हैं।

पंडित शर्मा के अनुसार पौराणिक मान्‍यताओं में बताया गया है कि मलिनमास होने के कारण कोई भी देवता इस माह में अपनी पूजा नहीं करवाना चाहते थे और कोई भी इस माह के देवता नहीं बनना चाहते थे, तब मलमास ने स्‍वयं श्रीहरि से उन्‍हें स्‍वीकार करने का निवेदन किया। तब श्रीहर‍ि ने इस महीने को अपना नाम दिया पुरुषोत्‍तम। तब से इस महीने को पुरुषोत्‍तम मास भी कहा जाता है। इस महीने में भागवत कथा सुनने और प्रवचन सुनने का विशेष महत्‍व माना गया है। साथ ही दान पुण्‍य करने से आपके लिए मोक्ष के द्वार खुलते हैं।

मान्यता के अनुसार अधिक मास में दान, पुण्य पूजा विशेष रूप से किए जाते है,अधिक मास मे किए गए पुण्य कार्यो का खास महत्व होता है। आपको बता दें कि ऐसा कई दशकों बाद हो रहा है जब श्राद्ध से एक महीने बाद होगी नवरात्रि पूजा शुरू होगी।

इस साल दो अश्विनमास...
जैसा की आप जानते हैं श्राद्ध खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि होती है और कलश स्थापना की जाती है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो रहा है। इस बार श्राद्ध समाप्त होते ही अधिकमास लग जाएगा, जिसके चलते नवरात्रि 20-25 दिन आगे खिसक जाएंगी। इस साल दो अश्विनमास हैं। ऐसा अधिकमास होने के कारण हो रहा है। इसलिए इस बार चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, पांच महीने का होगा।

ऐसे समझें : क्यों हो रही ये देरी...
पंडित सुनील शर्मा के अनुसार वर्ष 2019 (यानि संवत 2076) में 17 सितंबर को सर्वपितृ अमावस्या के अगले दिन से शारदीय नवरात्र की शुरुआत हो गई थी। जबकि इस बार वर्ष 2020 (यानि संवत 2077) में 2 सितंबर से पितृपक्ष शुरू हो रहे हैं, जिसकी अवधि 17 सितंबर तक रहेगी। पितृपक्ष की समाप्ति पर अधिकमास लग जाएगा। यह 28 दिन का होता है। इस अंतराल में कोई त्योहार नहीं मनाया जाता। इसलिए आमजन को पूरे एक महीने इंतजार करना पड़ेगा।

नवरात्र के देरी से आने के कारण इस बार दीपावली 14 नवंबर को रहेगी, जबकि यह पिछले साल 27 अक्टूबर को थी। अधिकमास होने के कारण 22 अगस्त को गणेशोत्सव के बाद जितने भी बड़े त्योहार हैं, वे पिछले साल की तुलना में 10 से 15 दिन देरी से आएंगे।

पंडित शर्मा के अनुसार अश्विन माह तीन सितंबर से प्रारंभ होकर 29 अक्टूबर तक रहेगा। इस बीच की अवधि वाली तिथि में 18 सितंबर से 16 अक्टूबर तक का समय अधिक मास वाला रहेगा। इस कारण 17 सितंबर को पितृमोक्ष अमावस्या के बाद अगले दिन 18 सितंबर से नवरात्र प्रारंभ नहीं होंगे।

बल्कि नवरात्र का शुभारंभ 17 अक्टूबर को होगा। देवउठनी एकादशी 25 नवंबर को है। माह के अंत में देवउठनी एकादशी के होने से नवंबर व दिसंबर दोनों ही महीनों में विवाह मुहूर्त की कमी रहेगी, क्योंकि 16 दिसंबर से एक माह के लिए खरमास शुरू हो जाएगा। दरअसल इस वर्ष दो अश्विन माह होने से यह वर्ष विक्रम संवत्सर 2077 (यानि अंग्रेजी वर्ष 2020) 13 माह का रहेगा।

17 अक्टूबर से शुरू होंगे नवरात्र -
इस साल 17 सितंबर 2020 को श्राद्ध खत्म होंगे। इसके अगले दिन अधिकमास शुरू हो जाएगा, जो 16 अक्टूबर तक चलेगा। इसके बाद 17 अक्टूबर से नवरात्रि व्रत रखें जाएंगे। इसके बाद 25 नवंबर को देवउठनी एकादशी होगी। जिसके साथ ही चातुर्मास समाप्त होंगे। इसके बाद ही शुभ कार्य जैसे विवाह, मुंडन आदि शुरू होंगे। इसके साथ ही इस दिन से शारदीय नवरात्र 2020 शुरु हो जाएंगी।

नवरात्रि का पर्व 17 अक्टूबर से होगा आरंभ...
17 अक्टूबर प्रथम दिन: मां शैलपुत्री पूजा
18 अक्टूबर दूसरा दिन: मां ब्रह्मचारिणी पूजा
19 अक्टूबर तीसरा दिन: मां चंद्रघंटा पूजा
20 अक्टूबर चौथा दिन: मां कुष्मांडा पूजा
21 अक्टूबर पांचवां दिन: मां स्कंदमाता पूजा
22 अक्टूबर छठवां दिन: मां कात्यायनी पूजा
23 अक्टूबर सातवां दिन: मां कालरात्रि
24 अक्टूबर आठवां दिन: मां महागौरी पूजा
25 अक्टूबर नवमी: मां सिद्धिदात्री नवरात्रि पारण

विष्णु भगवान के निद्रा में जाने से इस काल को देवशयन काल माना गया है। चतुर्मास में मनीषियों ने एक ही स्थान पर गुरु यानी ईश्वर की पूजा करने को महत्व दिया है। इससे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

ऐसी मान्यता है कि भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योग निद्रा पर निवास करते हैं। इस दौरान ब्रह्मांड की सकारात्मक शक्तियों को बल पहुंचाने के लिए व्रत पूजन और अनुष्ठान का भारतीय संस्कृत में अत्याधिक महत्व है। सनातन धर्म में सबसे ज्यादा त्यौहार और उल्लास का समय भी यही है। चतुर्मास के दौरान भगवान विष्णु की पूजा होती है।

जैसा की आप जानते हैं श्राद्ध खत्म होते ही अगले दिन से नवरात्रि की प्रतिपदा तिथि होती है और कलश स्थापना की जाती है। लेकिन इस साल ऐसा नहीं हो रहा है। इस बार श्राद्ध समाप्त होते ही अधिकमास लग जाएगा, जिसके चलते नवरात्रि 20-25 दिन आगे खिसक जाएंगी। इस साल दो अश्विनमास हैं। ऐसा अधिकमास होने के कारण हो रहा है। इसलिए इस बार चातुर्मास जो हमेशा चार महीने का होता है, पांच महीने का होगा।

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