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आधार की मदद से सरकार को अनाज बेचेंगे किसान, 10 करोड़ किसानों को मिलेगा फायदा

आधार वेरिफाई कर किसानों से सीधे तौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य पर अनाज खरीदेगी सरकार। हर सेंटर पर लैपटॉप व पीओएस मशीन की होगी सुविधा। व्यापारियों व बिचौलियों की मुनाफाखोरी पर नकेल कसने की तैयारी में सरकार।

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नई दिल्ली। बहुत जल्द किसानों को सीधे तौर पर न्यूनतम समर्थन मूल्य ( एमएसपी ) का फायदा देने के लिए सरकार अब आधार नंबर की मदद ले सकती है। दरअसल, केंद्र सरकार एक ऐसी योजना की तैयारी में है, जिससे किसानों और मंडियों के बीच काम करने वाले बिचौलियों की मुनाफाखोरी को रोका जा सकेगा। इसका फायदा किसानों को सीधे तौर पर मिल सकेगा।

इस योजना के तहत केंद्र सरकार किसानों के बायोमेट्रिक जानकारी की मदद से न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ देगी। इस संबंध में जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा, "हम ओडि़शा के चार जिलों के एक पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कर रहे हैं। एक बार यह प्रोजेक्ट सफल जो जायेगा, फिर इसे देशभर में लागू किया जायेगा।"

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अन्य सरकारी स्कीम की तरह ही राशन के लिए आधार होगा अनिवार्य

अधिकारी ने बताया कि बड़ी संख्या में शिकायतें आ रहीं थी कि व्यापारी और बिचौलिए, किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम कीमत पर अनाज खरीदते हैं और इसे ऊंचे दरों पर सरकार को बेचते हैं। सरकार को बेचने वाले मूल्य और किसानों से खरीदे गये मूल्य के बीच का अंतर वो अपने पास ही रखते हैं।

उन्होंने कहा, "इस नये प्रोजेक्ट से इस तरह की मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। अन्य सरकारी स्कीम की तरह ही, सरकार को कोई उत्पाद बेचने के लिए आधार अनिवार्य होगा। इस प्रकार के जरूरतमंद किसानों को उनका वाजिब दाम मिल सकेगा"

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हर सेंटर पर एक लाख रुपये खर्च करेगी सरकार

अधिकारी ने जानकारी दी कि सरकार प्रोक्योरमेंट सेंटर्स को कंप्यूटरीकृत करने के लिए 1 लाख रुपये का अनुदान देगी। उन्होंने कहा, "हर सेंटर पर एक लैपटॉप और एक प्वाइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन उपलब्ध होगी। इन पीओएस मशीन को आधार वेरिफिकेशन के लिए सेंट्रल डाटा सेंटर से लिंक किया जायेगा। इससे किसानों को सीधे तौर पर लाभ मिल सकेगा।"

आमतौर पर सरकार पब्लिक डिस्ट्रब्यूशन के लिए बड़े मात्रा में किसानों से चावल व गेहूं की खरीद करती है। इसके बाद सरकार गरीब लोगों सब्सिडी वाले दर पर इन्हें बेचती है। हर साल न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकार करीब 3.5 करोड़ टन गेहूं और 4.5 करोड़ टन चावल खरीदती है। यह खरीद करीब 10 करोड़ किसानों से होती है।

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इस अनाज को नेशनल फूड सिक्योरिटी (एनएफएसए ) के तहत 2-3 रुपये प्रति किलो के भाव से गरीब परिवारों को बेचा जाता है। मौजूदा नियमों के मुताबिक, सरकार प्रति व्यक्ति 5 किलो अनाज बेचती है। इसका लाभ करीब 5 लाख राशन दुकानों के जरिये 81 करोड़ लोगों को मिलता है। इससे सरकार की जेब पर 1.4 लाख करोड़ रुपये का बोझ पड़ता है।

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