
नई दिल्ली। जिस समय भारत में दुनिया की सबसे बड़ी एक लाख करोड़ रुपए की ई- कॉमर्स डील चल रही थी। उसी समय में पड़ोसी मुल्कों पाकिस्तान और चीन की दो कंपनियों में भी डील फाइनल हो रही थी। वैश्विक दृष्टि से देखने की कोशिश करें तो दोनों ही डील एक बड़ी जंग की ओर इशारा कर रही हैं। ये जंग यूएस और चीन की उसे ट्रेड वॉर से थोड़ी अलग है, लेकिन कम बिल्कुल भी नहीं। आखिर चीन और पाकिस्तान के बीच किस तरह की ई-कॉमर्स डील हुई है। इसका वैश्विक दृष्टी से क्या प्रभाव पड़ेगा। आइए जानने की कोशिश करते हैं।
अलीबाबा ने इस कंपनी को खरीदा
चीन की दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अलीबाबा ने पाकिस्तानी ई-कॉमर्स कंपनी दराज को खरीदा है। अलीबाबा ने अपने वैश्विक कारोबार को बढ़ाते हुए दक्षिण एशियाई बाजार में अपनी मजबूत पैठ के लिए यह कदम उठाया। अलीबाबा की ओर से यह कदम ई-कॉमर्स कंपनी लजादा में अपने निवेश को दोगुना करने के बाद उठाया गया है। अलीबाबा द्वारा जारी बयान के मुताबिक, दराज की स्थापना 2012 में हुई थी और इसे बर्लिन की एक कंपनी रॉकेट इंटरनेट से खरीदा गया है जो स्टार्टअप कंपनियों के पालन-पोषण का कारोबार करती है। उसका प्रमुख बाजार पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका, म्यांमार और नेपाल है। इस प्लेटफॉर्म से 30,000 विक्रेताओं और 500 ब्रांडों के जुड़े होने का दावा किया गया है। दराज ने कहा कि यह अधिग्रहण उसे अपने प्रमुख बाजार में वृद्धि करने में मदद करेगा।
वॉलमार्ट और अलीबाबा में तेज होगी जंग
इस डील के बाद दक्षिण एशिया में अपने बाजार को फैलाने की जंग और तेज हो जाएगी। क्योंकि वॉलमार्ट पिछले कुछ सालों में इंडियन मार्केट में एंट्री के लिए मचल रहा था। उसे मौका मिला फ्लिपकार्ट से। जिसके रास्ते वॉलमार्ट दक्षिण एशिया के दूसरे देशों में एंट्री करने की कोशिश करेगा। भारत के बहाने वो दूसरे देशों को रिझाने का प्रयास इसलिए भी करेगा क्योंकि उसे इस रीजन में अलीबाबा के रिटेल और ई-कॉमर्स चक्रव्यूह को भेदना है। वहीं दूसरी ओर अलीबाबा के लिए पाकिस्तान की कंपनी के साथ ये डील इसलिए जरूरी थी ताकि वो वॉलमार्ट को अपनी ताकत का अहसास करा सके।
ई-कॉमर्स के बहाने इकनॉमिक वॉर
चीन और अमरीका के बीच चल रही इस कोल्ड वॉर में ई-कॉमर्स के बहाने इकनॉमिक वॉर की शुरूआत हो जाएगी। दोनों कंपनियों को अपनी-अपनी देशों की सरकारों का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में इस जंग में दोनों देशों की सरकारें भी कूदेगीं। ऐसे में यह तय है कि इससे दक्षिण एशिया के देशों में रह लोगों को कुछ फायदें होंगे तो कुछ नुकसान भी उठाने होंगे। दोनों कंपनियों के बीच जंग में दक्षिण एशिया के देश भी बंटे हुए भी दिखाई देंगे।
Published on:
10 May 2018 02:12 pm
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