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Budget 2020: सुस्ती से जूझ रहे रियल एस्टेट सेक्टर को बजट से इंडस्ट्री का दर्जा मिलने की उम्मीद

रियल एस्टेट सेक्टर से जुड़े विशेषज्ञ का कहना है कि इस क्षेत्र में लंबी समय से सुस्ती का दौर जारी है। ऐसे में इस बार के बजट में कारोबारियों को सरकार से बड़ी उम्मीदें है।

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Budget 2020 Real estate sector expectations

नई दिल्ली। भारत की रियल एस्टेट ( Real Estate ) इंडस्ट्री नोटबंदी के बाद से ही सुस्ती के दौर से गुजर रही है। ऐसे में रियल एस्टेट कारोबारी इस बार बजट काफी उम्मीद लगाएं हुए बैठे हैं। रियल एस्टेट कारोबारी इस बार इंडस्ट्री ( Industry ) का दर्जा मिलने की उम्मीद जता रहे है। रियल एस्टेट सेक्टर के लोगों का मानना है कि बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( FM Nirmala Sitharaman ) इससे जुड़ी कोई न कोई घोषणा कर सकती हैं।

कारोबारी सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम की कर रहें हैं मांग

इस क्षेत्र के कारोबारी सिंगल विंडो क्लीयरेंस सिस्टम स्थापित करने की भी मांग कर रहे हैं। वहीं बिल्डरों को उम्मीद है कि बजट में होने वाली घोषणाएं को अलग नज़रिए से देख रहे है, इन सभी का मानना है कि बजट ( budget 2020 ) में होने जा रही नई घोषणाओं से इस क्षेत्र पर सकारात्मक असर होगा।

इसलिए ज्यादातर कारोबारी इस बात को लेकर काफी आश्वस्त है कि अबकी बार पेश होने जा रहे बजट में रियल एस्टेट ( Real Estate ) को इंडस्ट्री का दर्जा मिलेगा। हालांकि पिछले वर्ष के आखिरी महीनों में भी सरकार ने इस क्षेत्र को गति देने के लिए 25,000 करोड़ रुपये के पैकेज की घोषणा कर चुकी है।

इंडस्ट्री का दर्जा मिलने से रियल एस्टेट की ग्रोथ संभव

इस क्षेत्र से जुड़े कारोबारियों का मानना है कि रियल एस्टेट ( Real Estate ) को इंडस्ट्री का दर्जा मिलने पर ही इसका विकास संभव हो पाएगा, क्योंकि ये बात सभी बहुत अच्छे से जानते है कि पिछले काफी वक़्त से इंडस्ट्री काफी खराब हालातों से जूझ रही है। रियल एस्टेट सेक्टर में लंबी समय से सुस्ती का दौर चल रहा है।

जिसे समाप्त करने के लिए सरकार को इस तरह के सकारात्मक फैसले लेने पड़ेंगे। ये बात अलग है कि सरकार ने जो कदम उठाएं है वो अभी तक नाकाफी साबित हुए है। इन फैसलों का सकारात्मक नतीजा आने वाले कुछ माह में दिखाई देने लगेगा। ऐसे में यदि बजट भी इस क्षेत्र को बढ़ावा देने वाला होगा तो बात कुछ और होगी।

बिल्डर्स मांग रहे है विशेष अनुदान

सरकार से बिल्डर्स ने कई तरह के विशेष अनुदानों की मांग भी की है। इसलिए बजट में इससे जुड़ी हुई कुछ घोषणा ओर की जा सकती है।जबकि ज्यादातर कारोबरियों सिंगल ¨वडो क्लीयरेंस की वकालत कर रहें हैं, क्योंकि कई विशेषज्ञों का मानना है इससे सिस्टम पूरी तरह से पारदर्शी होगा जिससे किसी भी प्रोजेक्ट को तय समय से पूरा किया जा सकेगा।