लॉकडाउन में ट्रैक्टरों की जमकर हुई बिक्री, पिछले साल के मुकाबले 23 प्रतिशत ज्यादा रही सेल

  • Bumper Sale Of Tractors : मई और जून महीने में ट्रैक्टरों की सबसे ज्यादा हुई बिक्री
  • जानकारों के मुताबिक प्रवासी श्रमिकों के घर लौटने के चलते बिक्री में आई है तेजी

By: Soma Roy

Published: 20 Jul 2020, 04:57 PM IST

नई दिल्ली। लॉकडाउन (Lockdown) में जहां कई लोगों का कारोबार ठप हो गया है। वहीं हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। ऐसे में ट्रैक्टरों की हुई बंपर बिक्री ने ऑटो सेक्टर (Auto Sector) में हो रहे नुकसान की भरपाई में मददगार साबित हो रहा है। जानकारों के मुताबिक इस दौरान ट्रैक्टरों (Tractors Sale) की बिक्री में 23 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जो पिछले साल यानी जून 2019 के मुकाबले ज्यादा है। एक्पर्ट्स का मानना है कि लॉकडाउन के दौरान बढ़ी संख्या में श्रमिकों के घर लौटने के चलते कृषि पर ज्यादा जोर दिया गया है। इसी के चलते ट्रैक्टरों की सेल बढ़ी है।

एक न्यूज रिपोर्ट के मुताबिक जून महीने में सोनालिका ग्रुप के 13,691 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई है। कंपनी का मार्केट शेयर 15.4 फीसदी बढ़ा है। इसी तरह अन्य कंपनियों को भी काफी फायदा हुआ है। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि लॉकडाउन के बाद मई और जून महीने में हुई ट्रैक्टरों की बंपर बिक्री से ऑटो इंडस्ट्री को साल के अंत तक करीब 5 फीसदी का मुनाफा हो सकता है। आंकड़ों के अनुसार मार्च 2020 में करीब 35,216 ट्रैक्टरों की बिक्री हुई। वहीं अप्रैल में 12,456 यूनिट्स बिके। मई में 64,860 ट्रैक्टर और जून में 62,595 ट्रैक्टरों की खरीदारी हुई। इनमें अभी छोटे ट्रैक्टरों का डिटेल शामिल नहीं है। इस संकट की घड़ी में भी बड़े पैमाने पर हुई ट्रैक्टरों की बिक्री कृषि क्षेत्र के लिए अच्छा संकेत है।

जानकारों का मानना है कि लॉकडाउन के चलते काफी प्रवासियों को अपने घर लौटना पड़ा है। चूंकि उनके पास कमाई का और जरिया नहीं बचा, इसलिए उन्होंने खेती को मुख्य जरिया बना लिया। इसीलिए ट्रैक्टरों की बिक्री बढ़ी है। मालूम हो कि इससे पहले खरीफ समेत अन्य फसलों की बुवाई में भी नया रिकॉर्ड दर्ज किया गया। 17 जुलाई तक खरीफ फसलों की बुवाई 691.86 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है। जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में सिर्फ 570.86 लाख हेक्टेयर की ही बुवाई हो पाई थी। पिछले साल के मुकाबले इस बार बारिश भी 10 फीसदी अधिक हुई है। लॉकडाउन के दौरान धान और दलहन की बुवाई में भी बढ़ोत्तरी देखने को मिली।

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