
नर्इ दिल्ली। सीबीआई (केंद्रीय जांच ब्यूरो) द्वारा 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) घोटाले में दायर आरोप-पत्र में इलाहाबाद बैंक की मुख्य कार्यकारी अधिकारी और प्रबंध निदेशक उषा अनंतसुब्रमण्यम पर घोटाले में भूमिका के आरोप के बाद अब सरकार (वित्त मंत्रालय) ने उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनंतसुब्रमण्यम साल 2015 के अगस्त से 2017 के मई तक पीएनबी की एमडी और सीईओ रही हैं। सीबीआई ने उनसे इस घोटाले के संबंध में फरवरी में पूछताछ की थी। सोमवार को सीबीआई ने इस मामले में उनकी भूमिका को लेकर आरोप-पत्र दायर किया है।
पीएनबी के दो बोर्ड अधिकारियों को हटाने के भी निर्देश
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग में सचिव राजीव कुमार ने बताया कि सरकार ने पीएनबी और इलाहाबाद बैंक के 3 बोर्ड अधिकारियों को हटाने के निर्देश दिए हैं. इन अधिकारियों में 2 पीएनबी के कार्यकारी निदेशक और एक इलाहाबाद बैंक के प्रबंध निदेशक हैं। राजीव कुमार ने मीडिया को बताया कि बैंकों को इन अधिकारियों को कार्यमुक्त करने के लिए नोटिस जारी कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि सरकार के साफ निर्देश हैं कि किसी भी सरकारी कामकाज में लापरवाही बरतने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
निदेशक मंडल के समक्ष रखा गया प्रस्ताव
वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) ने इलाहाबाद बैंक के सरकारी प्रतिनिधि से अनंतसुब्रमण्यम से उनकी शक्तियां छीनने के लिए निदेशक मंडल के समक्ष प्रस्ताव रखने को कहा है। उन्होंने कहा कि इस प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय निदेशक मंडल लेगा। अधिकारी ने कहा कि पीएनबी के दो कार्यकारी निदेशकों के खिलाफ भी इसी प्रकार की कार्रवाई की जाएगी।
जारी रहेगा विभागीय जांच
उन्होंने कहा, "डीएफएस ने आरोपी अधिकारियों को पद से हटाने और बर्खास्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं, उनके खिलाफ विभागीय जांच भी अलग से जारी रहेगी।" इससे पहले वित्त मंत्रालय ने अनंतसुब्रह्मण्यम और 21 अन्य, जिनमें 11 बैंक अधिकारी शामिल हैं, के खिलाफ आरोप-पत्र दायर किया है। इस घोटाले के सूत्रधार और मुख्य आरोपी नीरव मोदी और मेहुल चोकसी हैं, जो देश से फरार हैं।
Published on:
15 May 2018 09:43 am
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