
नर्इ दिल्ली। केन्द्र सरकार टैक्स चोरी करने वालों के खिलाफ सख्त रुप अपनाने जा रही है, एेसे में अगर आप टैक्स बचत के लिए कोर्इ अवैध तरीका अपनाते हैं तो सावधान हो जाएं। फिलहाल सरकार की नजर टैक्स चोरी करने वाले 65 लाख लोगों पर है। इसके साथ ही सरकार उन लोगों पर भी नजर बनाए हुए है जिन्होंने पिछले साल अपना टैक्स रिटर्न फाइन नहीं किया है। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सरकार के पास करीब 1.5 लाख करोड़ रुपए अतिरिक्त जमा हुए हैं।
पहली बार टैक्स जमा करने वालों की संख्य में इजाफा
इस बार उन लोगों की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है जिन्होंने पहली बार टैक्स फाइल किया है। सरकार का मकसद अधिक से अधिक टैक्स पेयर को टैक्स चोरी करने से रोकना है। इससे सरकार के टैक्स कलेक्शन राशि में भी इजाफा होगा।
नोटबंदी के साथ-साथ इन तरीकों से बढ़ी टैक्स पेयर्स की संख्या
टैक्स भरने को लेकर सरकार के कहना है कि 8 नवंबर 2016 के दौरान किए गए नोटबंदी के बाद से टैक्स रिटर्न भरने वालों की संख्या में तेजी आर्इ है। इसके साथ ही टैक्स भरने को लेकर सरकार लगातार एसएमएस आैर विज्ञापन के माध्यम से लोगों को रिमाइंड कराती रही है। जिससे लोगों में जागरूकता बढ़ी है आैर उन्होंने समय पर टैक्स भरा है। आयकर विभाग के मुताबिक, इस बार करीब 1.75 करोड़ संभावित टैक्स पेयर्स को एसएमएस आैर इ-मेल के जरिए टैक्स भरने के लिए रिमाइंड किया गया है। इनमें से 1.07 करोड़ लोगों ने अपनी स्वेच्छा से टैक्स रिटर्न फाइल कर दिया है।
इस सिस्टम से पकड़े जाएंगे टैक्स चोर
इसके साथ ही बाकी बचे 65 लोगों की टैक्स चोरी पकड़ने के लिए सरकार एनएमएस (Non-Fillers Management System) का सहारा लेगी। इस सिस्टम के तहत कुछ डेटा सोर्सेज की मदद स उन लोगों के बारे में पता किया जाता है जिनकी अामदनी टैक्स योग्य तो है लेकिन वो टैक्स नहीं देते हैं। इस सिस्टम के तहत खासतौर पर वो लोग रडार पर होते हैं जो हार्इ वैल्यू में ट्रांजैक्शन करते हैं लेकिन रिटर्न फाइल नहीं करते हैं। इससे सरकार को पिछले कुछ सालों में टैक्स चोरों पर नकेल कसने में सफलता मिली है। इस सिस्टम से उन लोगों पर खासतौर से नजर रखी जाएगी जिन्होंने 500, 1000 रुपए के नोट के रुप में 10 लाख रुपए या उससे ज्यादा मूल्य के पैसे जमा करवाए हैं लेकिन अब तक अपना रिटर्न फाइन नहीं किया है। सरकार के पास 3 लाख लोगों की एेसी लिस्ट है जिनमें से 2.1 लाख लोगों ने अपना रिटर्न फाइल कर दिया है। इन लोगों ने सेल्फ असेसमेंट के तौर पर करीब 65,000 करोड़ रुपए का भुगतान किया है।
Published on:
01 May 2018 09:06 am
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