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लॉटरी पर एक जैसा 28 फीसदी होगा जीएसटी, एक मार्च 2020 से लागू होगा फैसला

लॉटरी पर फैसला लेने के लिए करानी पड़ी वोटिंग, पहली बार हुआ इस तरह से फैसला पहले 12 फीसदी राज्य लॉटरी और 28 फीसदी राज्य अधिकृत लॉटरी पर लगती थी जीएसटी

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नई दिल्ली।जीएसटी काउंसिल मीटिंग ( GST Council meeting ) के इतिहास में पहली बार किसी मुद्दे पर वोटिंग की गई और उसके बाद फैसला लिया गया। मामला था लॉटरी पर सभी राज्यों में समान रूप में जीएसटी ( GST ) लगाया जाए या नहीं। जीएसटी परिषद की बैठक में वोटिंग की कोई परंपरा नहीं थी। ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Finance Minister Nirmala Sitharaman ) की अध्यक्षता में ऐसा पहली बार हुआ है। आपको बता दें कि जीएसटी काउंसिल की 38 बैठक हो चुकी हैं। जिसमें पहली बार इस तरह की प्रक्रिया को अपनाया गया है।

लॉटरी पर समान 28 फीसदी जीएसटी होगी लागू
वास्तव में मुद्दा था राज्यों में राज्य सरकार द्वारा संचालित लॉटरी और राज्य सरकार द्वारा अधिकृत लॉटरी पर समान रूप से जीएसटी लागू किया जाए। जिस पर सभी राज्यों में सहमति नहीं बन पा रही थी। जिसके बाद एक सदस्य ने इस मामले में वोटिंग कराने को कह दिया। जिसके बाद यह आदेश हो गया कि अब राज्य सरकार द्वारा संचालित लॉटरी और राज्य सरकार द्वारा अधिकृत लॉटरी पर समान रूप से 28 फीसदी जीएसटी लागू होगी। इससे पहले राज्य सरकार द्वारा संचालित लॉटरी पर 12 फीसदी जीएसटी लगता था।

मतदान को लेकर बोलीं निर्मला सीतारमण
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण परिषद में मतदान न करने की परंपरा से भटकने पर कहा कि परंपरा को जीवित रखने के लिए हरसंभव प्रयास किए गए, लेकिन अंतत: परिषद को याद दिलाया गया कि परंपरा नियम पुस्तिका का हिस्सा नहीं थी। यह परिषद या मेरे द्वारा नहीं बल्कि किसी सदस्य के अनुरोध पर लगाया गया था। आपको बता दें कि 38 बैठकों में ऐसा पहली बार हुआ है कि जब किसी मुद्दे पर मतदान हुआ है। यह संयोग ही है कि निर्मला सीतारमण के वित्त मंत्री बनने के बाद कुछ परंपराओं में बदलाव हुए हैं। बजट 2019-20 में बजट को बहीखाता कहा गया। वहीं ब्रीफकेस के बदले में वित्त मंत्री लाल कपड़े में बांधकर बजट कॉपी लेकर आईं थी।

बजट से पहले अहम थी यह बैठक
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि राज्यों को जीएसटी मुआवजे पर चर्चा के संबंध में कहा कि सभी राज्यों ने इस बात को माना है कि कुछ दिन पहले ही सभी राज्यों को मुआवजा रिलीज हो चुका है। आपको बता दें कि बजट से पहले इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा था। इकोनॉमी सुस्त है और रेवेन्यू काफी गिरा हुआ है। ऐसे में वित्त मंत्री के सामने इकोनॉमी को बूस्ट करने और रेवेन्यू बढ़ाने दोनों बड़े चैलेंज हैं। ऐसे में सभी राज्यों से सुझाव भी मांगे गए थे।