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पीएम बनने से पहले पायलट की नौकरी में मात्र 5 हजार रुपए महीना कमाते थे राजीव गांधी

राजनीति में आने से पहले पायलट की नौकरी करते थे राजीव दिल्ली-जयपुर-आगरा रूट पर पैसेंजर प्लेन उड़ाया करते थे राजीव राजीव गांधी को इस नौकरी के लिए महीने में मिलते थे 5000 रुपए

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Saurabh Sharma

Aug 20, 2019

Rajiv Gandhi

नई दिल्ली। यह बात किसी से छिपी नहीं है कि राजीव गांधी कभी भी पॉलीटिक्स में नहीं आना चाहते थे। वो एक पायलट थे और उसमें खुश थे। वो एक फैमिली पर्सन की तरह रहना चाहते थे। राजीव गांधी को भी नहीं पता था कि उनकी जिंदगी में ऐसे उतार चढ़ाव आएंगे कि उन्हें राजनीति में आना होगा और देश के प्रधानमंत्री भी बनना होगा। पहले पॉलिटीशियन भाई संजय गांधी की मौत और उसके कुछ सालों के बाद मां इंदिरा गांधी की मृत्यु ने उन्हें हिला कर रख दिया था। देश की नजरें राजीव गांधी पर थी। मजबूरन उन्हें पॉलिटिक्स में आना पड़ा। जिसके बाद उन्हें अपनी पायलट की नौकरी छोडऩी पड़ी और देश सेवा के लिए अपने आपको समर्पित कर दिया। क्या आप जानते हैं कि पीएम बनने से पहले राजीव गांधी पायलट की नौकरी में कितनी सैलरी पाते थे? आइए आज आपको उनके जन्मदिन पर उनके इस राज के बारे में बताते हैं...

आज है राजीव गांधी का जन्मदिन
आज पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की 75वीं जयंती है। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। उनका नाम देश के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में लिया जाता है। जब वो प्रधानमंत्री बने थे तो उनकी उम्र 40 साल 72 दिन थी। उन्होंने 1966 में सोनियां गांधी से शादी की थी। सोनियां गांधी और वो खुद पॉलिटिक्स में नहीं आना चाहते थे। छोटे भाई की मौत के बाद अपनी मां इंदिरा गांधी की पॉलिटिक्स में मदद करने के लिए मजबूरी में राजनीति में आना पड़ा। माता की मौत के बाद तो पूरी तरह से देश के लिए समर्पित हो गए।

ब्रिटेन में की थी पायलट की पढ़ाई
राजीव गांधी प्रोफेशनली ट्रेंड पायलट थे। जिसकी पढ़ाई और ट्रेनिंग लंदन में की थी। वो साल 1966 में ब्रिटेन से प्रोफेशनल पायलट बनकर लौटे थे। जिसके बाद वो दिल्ली-जयपुर-आगरा रूट पर पैसेंजर प्लेन उड़ाया करते थे। उनकी लाइफ काफी अच्छी चल रही थी। मां देश की प्रधानमंत्री थी। उसके बाद भी उन्हें एक मामूली पायलट बनने में कोई शर्म नहीं थी। वो अपना काम ईमानदारी से करते थे और राजनीति से दूर रहते थे।

मात्र पांच हजार रुपए कमाते थे राजीव
देश के प्रधानमंत्री के पुत्र और संपन्न परिवार से ताल्लुक रखने के बावजूद वो मात्र पांच हजार रुपए कमाते थे। उस समय ये बड़ी बात थी कि देश के प्रधानमंत्री का बेटा होते हुए भी वो नौकरी करते थे और महीने में पांच हजार रुपए कमाते थे। ऐसा करने की हिम्मत हर कोई नहीं जुटा पाता था। जानकारों की मानें तो इतने सरल प्रधानमंत्री देश के इतिहास में कभी थे और ना ही कभी आएंगे।