बजट 2019 : ऐसे तैयार होता है देश का बजट, इंटेलिजेंस और दिल्ली पुलिस का भी होता है रोल

- Budget 2019 का काउंटडाउन शुरु हो चुका है

- पहली बार महिला वित्त मंत्री पेश करेंगी बजट

- इकोनॉमिक अफेयर्स का बजट डिवीजन बनाता है देश का बजट

By: manish ranjan

Updated: 01 Jul 2019, 07:53 AM IST

नई दिल्ली। देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ( Nirmala Sithraman ) 5 जुलाई को देश का आम बजट पेश करने जा रही है। उम्मीद की जा रही है कि बजट में सरकार आम लोगों और टैक्सपेयर्स के लिए कुछ अच्छी घोषणाएं कर सकती है। लेकिन क्या आपको पता है कि बजट ( budget ) बनाने में केवल वित्त मंत्रालय और दूसरे मंत्रालयों से जुड़ें अधिकारियों का ही रोल नहीं होता है। बजट बनाने में इंटेलिजेंस और दिल्ली पुलिस का भी रोल होता है। आज हम आपको ये बताने जा रहे हैं कि किसी तरह खुफिया तरीके से सरकार बजट की सारी प्लानिंग करती है। ताकि कोई भी जानकारी लीक न हो सके।

ऐसे होती है बजट बनाने की तैयारी

आपको बता दें कि सरकार का बजट पूरे एक वित्त वर्ष में देश को कैसे चलाया जाएगा इसका ब्यौरा होता है। सरकार की बजट में हुई घोषणाओं से भारत के आम से लेकर खास आदमी तक प्रभावित होता है। बजट में सरकार आने वाले वित्त वर्ष के लिए अपने खर्च, आय अनुमान, योजनाएं, राहत आदि का जिक्र करती है। जिसका असर आम से लेकर खास आदमी तक पर पड़ता है। बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि बजट बनाने की प्रक्रिया हर साल अगस्त-सितंबर में शुरू हो होती है, जो पूरी तरह गोपनीय रहती है। सरकार इस बात का पुख्ता इंतजाम करती है कि बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक ना हो पाए। भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के अधीन एक डिवीजन है इकोनॉमिक अफेयर्स, और इसके अंदर एक विभाग है बजट डिवीजन। ये डिवीजन ही हर साल सरकार का बजट बनाती है।

ऐसे होती बजट बनाने की शुरूआत

बजट बनाने की शुरूआत से लेकर बजट पेश होने वाले दिन तक इसकी हर प्रक्रिया जैसे की प्रिटिंग का कागज, प्रिटिंग, पैकेजिंग और संसद पहुंचने की प्रक्रिया तक को पूरी तरीके से गोपनिय रखा जाता है। साथ ही इसकी सुरक्षा और गोपनीयता के लिए प्रशिक्षित डॉग स्क्वॉड बजट को तैनात किया जाता है। इसके लिए प्रत्येक मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और वित्त मंत्रालय के बीच कई बार बैठक होती है। ताकि हर मंत्रालय के लिए फंडिंग तय की जा सकें। प्रत्येक मंत्रालय से बातचीत करके फंडिंग तय करने के कारण ये प्रक्रिया लंबी चलती है और इसमें नवंबर तक का समय लग जाता है।

बजट की पहली ड्राफ्ट कॉपी

जब बजट पूरी तरीके से तैयार हो जाता है तो तब उसकी पहली ड्राफ्ट कॉपी वित्त मंत्री के समक्ष पेश की जाती है। इसे फर्स्ट कट ऑफ बजट कहा जाता है और इसके पेपर का कलर ब्लू होता है। इसके बाद वित्त मंत्री जनवरी में सभी बैंक एसोसिएशन विभिन्न उद्योग समूह के प्रतिनिधियों और जाने-माने अर्थशास्त्रियों के साथ बैठक करते हैं। साथ ही विभिन्न मुद्दों पर सबकी राय ली जाती है।

ऐसे होती है बजट की प्रिंटिंग

बजट के पूरी तरह से तैयार होने के बाद इसके सभी डॉक्युमेंट की प्रिंटिंग वित्त मंत्रालय के बेसमेंट में की जाती है। बजट के प्रिंट होने के एक सप्ताह पहले लगभग 100 लोगों को जांच-पड़ताल करके प्रिंट के लिए भेजा जाता है। इन 100 लोगों को बजट प्रिंट होने तक वहीं रुकना होता है। इसके अलावा सुरक्षा को और कड़ा करने के लिए प्रिंटिंग रूम में सिर्फ एक ही फोन रखा जाता है। जिस पर सिर्फ फोन आ सकता है। हालांकि, बात करते वक्त इंटेलिजेंस का एक आदमी हमेशा खड़ा रहता है। इसी के साथ डॉक्टरों की एक टीम प्रेस में हमेशा मौजूद रहती है ताकि प्रेस में काम करने वाले किसी भी कर्मचारी की तबीयत खराब होने पर उसका तुरंत इलाज किया जा सके।

ऐसे रखते हैं बजट को सीक्रेट

बजट के पूरी तरीके से प्रिंट होने से पहले अगर किसी शख्स को किसी इमरजेंसी के कारण बाहर निकलना पड़ता है, तो इंटेलिजेंस का एक आदमी और दिल्ली पुलिस का एक आदमी हमेशा उसके साथ रहता है। इतना ही नहीं इन 100 लोगों को जो भी खाना-पीना दिया जाता है,उसकी पहले अच्छे से जांच की जाती है। जांच कर पता लगाया जाता है कि खाना-पीना पूरी तरीके से सुरक्षित है या नहीं। जब इस बात की पुष्टी हो जाती है कि खाना पूरी तरीके से सुरक्षित है तभी इन लोगों को खाना दिया जाता है।

सबसे पहले यहां होता है बजट पेश

बजट के पेश होने से लगभग एक महीने पहले मीडिया को वित्त मंत्रालय से दूर कर दिया जाता है। जिससे की बजट से जुड़ी कोई भी जानकारी बाहर ना जा सकें। इंटेलिजेंस ब्यूरो के लोग वित्त मंत्रालय को पूरी तरह से सुरक्षित रखने में लगे रहते हैं। इतना ही नहीं बजट से जुड़े लोगों के फोन को भी टेप किया जाता है। ताकि बजट से जुड़ी कोई भी बात बाहर ना आ सकें। इसके बाद जब बजट बन कर तैयार हो जाता है तब वित्त मंत्री संसद में बजट पेश करने से पहले भारत के राष्ट्रपति और केंद्रीय मंत्रिमंडल के समक्ष बजट की समरी पेश करते हैं। इसके बाद जाकर संसद में बजट को पेश किया जाता है।

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