दिवाली से पहले सरकार ने कारोबारियों को दिया बड़ा गिफ्ट, कॉरपोरेट टैक्स में कटौती, मैट को किया खत्म

  • जीएसटी की मीटिंग से पहले एफएम ने मीडिया के सामने किए बड़े ऐलान
  • शेयर बायबैक पर 20 फीसदी का बढ़ा हुआ टैक्‍स नहीं लगेगा

Saurabh Sharma

September, 2007:29 PM

नई दिल्ली। जीएसटी काउंसिल से ठीक पहले देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मीडिया से मुलाकात के दौरान कई घोषणाएं की। उन्होंने कारोबारियों को राहत देते हुए कॉरपोरेट टैक्स घटाने के ऐलान करने के साथ इक्विटी से कैपिटल गेंस पर लगने वाले सरचार्ज को भी खत्म कर दिया है। वहीं सबसे बड़ा ऐलान यह हुआ कि मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स खत्म कर दिया गया है। इन बड़े ऐलानों के बाद शेयर बाजार में एक हजार से ज्यादा उछाल देखने को मिला है। आइए आपको भी बताजे हैं कि आखिर किस तरह के ऐलान हुए हैं।

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काॅरपोरेट टैक्स में कटौती
गोवा में होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कंपनी और कारोबारियों को राहत देते हुए कॉरपोरेट टैक्‍स घटाने का ऐलान किया। निर्मला सीतारमण ने बताया कि टैक्‍स घटाने का अध्‍यादेश पास हो चुका है। उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट टैक्स को घटाकर 22 फीसदी कर दिया गया है। वहीं घरेलू कंपनियों पर बिना किसी छूट के इनकम टैक्स 22 फीसदी होगा और सरचार्ज और सेस जोड़कर प्रभावी दर 25.17 फीसदी हो जाएगी। वहीं लांग टर्म कैपिटल गेंस पर लगे सरचार्ज को पूरी तरह से हटा लिया गया है। इसे बजट में बढ़ा दिया गया था। इसके बाद शेयर बाय बैक पर 20 फीसदी का बढ़ा हुआ टैक्‍स नहीं लगाया जाएगा।

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मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स खत्म
वहीं वित्त मंत्री ने मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स को पूरी तरह से खत्म कर दिया गया है। दरअसल, यह टैक्‍स ऐसी कंपनियों पर लगाया जाता है जो मुनाफा कमाती हैं, लेकिन रियायतों की वजह से इन पर टैक्‍स की देनदारी कम होती है। इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115 जेबी के तहत मिनिमम अल्टरनेटिव टैक्स लगता है। वित्त मंत्री ने बताया कि इन रियायतों के बाद देश की केंद्र सरकार को 1.45 लाख करोड़ रुपए का राजस्व घाटा होगा।

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बजट की खामियों को किया जा रहा है दूर!
पिछले डेढ़ महीने से देश की वित्त मंत्री तमाम तमाम घोषणाएं कर रही हैं। उन तमाम चीजों में रियायत देने की कोशिश की जा रही है, जिन्हें बजट में लोगों पर बोझ बना दिया गया था। जानकारों की मानें तो अब सरकार बजटीय खामियों को दूर करने की कोशिश की जा रही है। जानकारों का कहना है कि व्यापारियों पर जिस तरह के सेस लगाए गए थे, उससे देश की इकोनॉमी और इंडस्ट्री खराब दौर में जा रही थी।

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