
बैंक एफडी नहीं, बल्कि यहां मिल रहा अधिक ब्याज दर, होगी भारी बचत
नई दिल्ली। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां ( NBFC ) ब्याज के मामले में बैंकों को लगातार चुनौती दे रहे हैं। बैंकों की तुलना में एनबीएफसी नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर ( NCD ) पर कहीं अधिक ब्याज दे रहे हैं। ऐसे में निवेशकों के पास इस मौके को भुनाने का शानदार मौका है। एक तरफ बैंकों में डिपॉजिट की रफ्तार सुस्त है वहीं बॉन्ड पर ज्यादा रिटर्न देकर एनबीएफसी निवेशकों को लुभा रहे हैं। इसका अंदाज आप इस बात से ही लगा सकते हैं कि 15 मार्च को खत्म हुए पखवाड़े में बैंकों के कुल डिपॅाजिट में 4,410 करोड़ रुपए की कमी आई है। वहीं, दूसरी तरफ करीब दर्जनभर एनबीएफसी एनसीडी के माध्यम से 3,000 करोड़ रुपए जुटाने की तैयारी में हैं।
ब्याज दरों में कटौती से बैंकों के लिए परेशानी
अब छोटे निवेशक भी शेयर के बजाय म्यूचुअल फंड में निवेश को वरीयता दे रहे हैं। इससे बैंकों पर जमा की रकम पर ब्याज दरें बनाए रखने का दबाव बढ़ गया है। वहीं, आरबीआई ने हाल ही में लिए गए अपने फैसले में ब्याज दरों में कटौती की है। कई बैंकों ने आरबीआई के इस फैसले के बाद अपने एमसीएलआर में कटौती भी किया है। ऐसे में बैंकों को अब SREI इन्फ्रास्ट्रकचर फाइनेंस, मैग्मा फिनकॉर्प, श्रीराम सिटी यूनियन फाइनेंस, और मूथुट फाइनेंस से सीधे टक्कर मिल रही है। आगामी तीन सप्ताह में इनकी योजना 2,050 करोड़ रुपए जुटाने की है
एनसीडी से मिल रहा 10.75 फीसदी तक का ब्याज
बता दें कि इसके पहले ही एक वित्तीय कंपनी ने एनसीडी के जरिए 1,000 करोड़ रुपए जुटा लिया है। एक जानकार का कहना है कि हाल ही में आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती किया है जिसके बाद खुदरा निवेशकों के लिए एनसीडी में निवेश करना बेहतर लग रहा है। ये कंपनियां 8.60 फीसदी से लेकर 10.75 फीसदी की ब्याज दरों का पेशकश कर रही हैं, जोकि बैंकों के मुकाबले कहीं अधिक है। भारतीय स्टेट बैंक पांच साल के डिपॉजिट पर आपको 6.85 फीसदी की दर से ब्याज दे रहा है। वहीं बंधन बै।क में 18 महीने से दो साल के डिपॉजिट पर 7365 फीसदी की ब्याज दे रहा है।
आखिर क्यों एनसीडी का सहारा हैं एनबीएफसी
आपको बता दें कि गैर-बैंकिंग वित्तीय बैंकों की तर्ज पर ही काम करती हैं। लेकिन, एनबीएफसी के लिए परेशानी ये होती है कि उन्हें सस्ती दर पर फंड नहीं मिलता है। फंड जुटाने के लिए वे एनसीडी और कॉमर्शियल पेपर का सहारा लेती हैं। एनसीडी एक तरह का बॉन्ड होता है। कंपनी इसे उधार लेने के लिए जारी करती है और बाद में मैच्योरिटी पूरा होने के बाद ब्याज के साथ भुगतान करती है।
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Published on:
14 Apr 2019 08:44 pm

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