
PNB Scam
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में पीएनबी घोटाले की याचिका का केंद्र सरकार ने विरोध करते हुए सुनवाई के लिए अयोग्य करार दिया है। वहीं सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहले वो इस बात की सुनवाई करेगा कि याचिका सुनवाई योग्य है या नहीं। अब इस मामले में अगली सुनवाई 23 अप्रैल को होगी।
सरकार को देना था जवाब
वकील विनीत ढांडा की डाली गई याचिका पर केंद्र को जवाब देना था। अटॉर्नी जलरल मुकुल रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट की दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने जवाब दिया। जिसमें जस्टिस जेएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ भी शामिल थे। अटॉर्नी जलरल मुकुल रोहतगी ने कहा कि सभी जांच एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। ऐसे में याचिकाकर्ता चाहता है कि सुप्रीम कोर्ट मामले की निगरानी करे. ये याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
याचिका के मुख्य बिंदु
- याचिका में कहा गया है कि इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक के वरिष्ठ अफसरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई की जाए।
- केंद्र सरकार को निर्देश दिया जाए कि नीरव मोदी का जल्द प्रत्यर्पण किया जाए।
- दस करोड़ रुपए से ऊपर के बैंक लोन के लिए गाइडलाइन बनाई जाए।
- जो लोग लोन डिफाल्टर हैं, उनकी संपत्ति तुरंत सीज करने जैसे नियम बनाए जाएं।
- एक एक्सपर्ट पैनल का गठन हो जो बैंकों द्वारा 500 करोड़ व ज्यादा के बैड लोन का अध्ययन कर रिपोर्ट कोर्ट को दे।
- याचिका में ये भी कहा गया है कि बड़े लोगों को राजनीतिक लोगों का सरंक्षण प्राप्त होता है इसलिए वो पकड़ में नहीं आते।
- याचिका में कहा गया है कि इस तरह के घोटालों ने देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाया है।
ये है पूरा मामला
आपको बता दें कि पीएनबी को मौजूदा समय में नीरव मोदी और मेहुल चोकसी द्वारा किए गए घोटाले से जूझना पड़ा रहा है। दोनों ने कुछ बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर गैर-कानूनी तरीके से लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (एलओयू) का नवीनीकरण कराकर बैंकों से रुपया लिया। बाद में दोनों ही अपने परिवार के साथ जनवरी के पहले सप्ताह में विदेश भाग गए। जिसके बाद दोनों के ऊपर केस दर्ज किया गया।
Published on:
09 Apr 2018 02:13 pm
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