
नई दिल्ली। बीते एक साल से नकदी की कमी से जूझ रहे गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए आज रिजर्व बैंक ने एक राहत की खबर दी है। आरबीआई ने आज अपनी मौद्रिक नीति बैठक में एनबीएफसी सेक्टर से जुड़े दो बड़े फैसले लिये हैं। एनबीएफसी सेक्टर के लिए सबसे पहली राहत तो यह है कि उनके लिए लेंडिंग नॉर्म को पहले से आसान कर दिया गया है। वहीं, दूसरी राहत की बात यह है कि एनबीएफसी को बैंक द्वारा दिये जाने वाले कर्ज की सीमा को बढ़ाने का भी फैसला लिया गया है।
साथ ही अब बैंक भी एनबीएफसी के जरिये प्राथमिक क्षेत्रों के जरिये कर्ज दे सकेंगे। लंबे समय से लिक्विडिटी की मार झेल रहे इस सेक्टर को अब आरबीआई के इस फैसले से वित्तीय राहत मिलने के आसार दिखाई दे रहे हैं। ?
आरबीआई ने बढ़ाया एक्सपोजर लिमिट
तीन दिवसीय बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि एनबीएफसी में बैंकों के एक्सपोजर लिमिट को बढ़ाने का फैसला लिया गया है। मौजूदा समय में किसी बैंक के टियर 1 पूंजी का सिर्फ 15 फीसदी ही सिंगल एनबीएफसी में एक्सपोजर हो सकता है। आरबीआई ने अब इस सीमा को बढ़ाकर 20 फीसदी कर दिया है।
ध्यान देने वाली बात है कि अन्य क्षेत्र की एक ही कंपनी में यह सीमा 20 फीसदी है। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थिति में बैंक बोर्ड से अनुमति लेकर इसे 25 फीसदी तक भी बढ़ाया जा सकता है।
इन क्षेत्रों को मिल सकेगा कर्ज
शक्तिकांत दास ने कहा कि बैंक अब एनबीएफसी के जरिये प्राथमिक क्षेत्रों को कर्ज दे सकेंगे। उन्होंने कह कि कुछ प्राथमिक क्षेत्रों के लिए क्रेडिट फ्लो में बढ़ोतरी कर निर्यात के साथ-साथ रोजगार बढ़ाने में भी मदद मिलेगी। यही कारण है कि उन क्षेत्रों में एनबीएफसी के भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।
बैंकों को रजिस्टर्ड एनबीएफसी के जरिए 10 लाख रुपये के कृषि ऋण, छोटे उद्यमियों को 20 लाख रुपये तक के ऋण और प्रति ग्राहक 20 लाख रुपये तक के आवास ऋण को प्राथमिक क्षेत्र में शामिल किया गया है। अब तक 10 लाख रुपये तक के आवास ऋण इस श्रेणी में शामिल था। इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश इसी महीने के अंत तक जारी किये जाएंगे।
Updated on:
07 Aug 2019 07:03 pm
Published on:
07 Aug 2019 07:03 pm
