चुनाव के दौरान SBI ने बेचे 3600 करोड़ के चुनावी बॉन्ड, RTI से मिली जानकारी

चुनाव के दौरान SBI ने बेचे 3600 करोड़ के चुनावी बॉन्ड, RTI से मिली जानकारी

Shivani Sharma | Publish: May, 11 2019 12:04:46 PM (IST) फाइनेंस

  • चुनाव के दौरान देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (State Bank Of India) ने 3,622 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड बेचे
  • इस बारे में खुलासा आरटीआई से हुआ है
  • सबसे ज्यादा मुंबई में बिके चुनावी बॉन्ड

नई दिल्ली। चुनाव के दौरान देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ( state bank of india ) ने 3,622 करोड़ रुपए के चुनावी बॉन्ड बेचे हैं। इस बारे में खुलासा आरटीआई से हुआ है। सूचना के अधिकार के तहत पूछे गए सवाल के जवाब में बताया गया कि सिर्फ दो महीने मार्च और अप्रैल में ही लोगों ने इन बॉन्डों की खरीदारी की है। पुणे के विहार दुर्वे ने ये आरटीआई दायर किया था।


सबसे ज्यादा मुंबई में बिके चुनावी बॉन्ड

आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार बैंक ने मार्च में 1356.37 करोड़ और अप्रैल में 2256.37 करोड़ रुपए के बॉन्ड बेचे हैं। सबसे ज्यादा बॉन्ड मुंबई में बेचे गए हैं। मुंबई में लगभग 694 करोड़ रुपए के बॉन्ड बेचे गए हैं। इसके बाद सबसे ज्यादा बॉन्ड कोलकाता और देश की राजधानी में बिके हैं। यह बॉन्ड एसबीआई की चुनिंदा शाखाओं में उपलब्ध होते हैं।


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क्या होता है चुनावी बॉन्ड

आपको बता दें कि चुनावी बॉन्ड एक तरह से करेंसी नोट की तरह होता है। इस बॉन्ड के जरिए राजनीतिक पार्टियों को चंदा दिया जाता है। बैंक चुनाव के दौरान ये बॉन्ड जारी करती है। आप इस बॉन्ड को खरीद कर किसी भी पार्टी को चंदा दे सकते हैं। इस बॉन्ड को खरीदने के लिए आपको बैंक से संपर्क करना होता है और यह बॉन्ड सभी शाखाओं पर उपलब्ध नहीं होते हैं। राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 2017-18 के बजट के दौरान चुनावी बॉन्ड शुरू करने की घोषणा की गई थी। यह बॉन्ड 1000 रुपए, दस हजार रुपए, 1 लाख, दस लाख और एक करोड़ रुपए के मूल्य में उपलब्ध हैं।


SBI की शाखा से खरीद सकते हैं बॉन्ड

वित्त मंत्रालय से नोटिस जारी होने के बाद ही आप इसे खरीद सकते हैं। आप इऩ बॉन्ड को स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से खरीद सकते हैं। इस बॉन्ड को खरदीने के लिए आपके पास भारत की नागरिकता होना जरूरी है। इसके अलावा उसे 15 दिनों के भीतर राजनीतिक पार्टियों को बैंक से कैश कराना होता है। बांड पर जो भी लोग चंदा देते हैं उसे गुप्त रखा जाता है। इसकी जानकारी सिर्फ बैंक के पास होती है।

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