
नई दिल्ली। वित्त वर्ष 2004-05 के बाद इनकम टैक्स में स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा खत्म कर दी गई थी। लेकिन अब करीब 13 सालों बाद 1 फरवरी को आने वाले बजट में इसे लागू किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, बजट में स्टैंडर्ड डिडक्शन फिर लाने का ऐलान हो सकता है। टैक्स स्लैब के हिसाब से डिडक्शन की दरें अलग-अलग होंगी।
इन्हें मिलेगा सबसे अधिक फायदा
सैलरी क्लास में 5 लाख रुपये के स्लैब में सबसे ज्यादा डिडक्शन मुमकिन है, जबकि 10 लाख रुपये तक वाले स्लैब में डिडक्शन कम हो सकता है। वहीं 10 लाख रुपये से ज्यादा वाले स्लैब के लिए फ्लैट डिडक्शन हो सकता है। आपको बता दें कि स्टैडर्ड डिडक्शन की रकम पर इनकम टैक्स नहीं देना होता है और डिडक्शन की रकम पर टैक्स बचाने के लिए कोई सबूत नहीं देना होता है। 2004-05 तक स्टैंडर्ड डिडक्शन की सुविधा मौजूद थी। पहले स्टैंडर्ड डिडक्शन के दो स्लैब थे। 5 लाख रुपये तक की सैलरी वालों के लिए 30,000 रुपये या 40 फीसदी (जो भी कम) तक का डिडक्शन का प्रावधान था। वहीं, 5 लाख रुपये से ज्यादा की सैलरी वालों के लिए 20,000 रुपये तक का डिडक्शन का प्रावधान था।
ये भी होंगे बदलाव
माना जा रहा है वित्त मंत्रालय ने इस बारे में प्रस्ताव को अंतिम रूप दे दिया गया है। एक बार पीएमओ से मंजूरी मिल गई तो इसको शामिल करने पर फैसला लिया जा सकता है। इसके अलावा इस बार बजट में कैपिटल गेन्स टैक्स में बदलाव किया जा सकता है। माना जा रहा है कि बजट में लिस्टेड शेयरों में निवेश पर टैक्स में बदलाव संभव है। बजट में लिस्टेड शेयरों में निवेश पर शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स की अवधि 1 साल से बढ़ाकर 2 या तीन साल तक की जा सकती है। फिलहाल इक्विटी और इक्विटी म्यूचुअल फंड दोनो पर ही 15 फीसदी की दर से शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स का प्रावधान है।
Published on:
10 Jan 2018 12:43 pm
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