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बंटवारे के वक्त भारतीय रेलवे के इस अहम रेलवे स्टेशन का 40 फीसद हिस्सा आया पाकिस्तान के हिस्से में, पढ़िये हैरान कर देने वाली कहानी

— पहली यात्री ट्रेन बोरी बंदर से ठाणे के लिये चलाई गई थी।— हिन्दुस्तान के बंटवारे में 40 प्रतिशत रेल नेटवर्क पाकिस्तान में चला गया।

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बंटवारे के वक्त भारतीय रेलवे के इस अहम रेलवे स्टेशन का 40 फीसद हिस्सा आया पाकिस्तान के हिस्से में, पढ़िये हैरान कर देने वाली कहानी

बंटवारे के वक्त भारतीय रेलवे के इस अहम रेलवे स्टेशन का 40 फीसद हिस्सा आया पाकिस्तान के हिस्से में, पढ़िये हैरान कर देने वाली कहानी

फिरोजाबाद। टूंडला जंक्शन काफी महत्वपूर्ण और प्रमुख रेलवे स्टेशन है। इस छोटे से नगर में रेलवे ने अपना कंट्रोल रूम स्थापित किया है। इससे इलाहाबाद से लेकर गाजियाबाद तक की ट्रेनों की वर्तमान स्थिति पता लग जाता है। ऐसे ही प्रमुख स्टेशन टूंडला के बारे में अधिकतर लोग नहीं जानते होंगे कि इसका पुराना इतिहास क्या है।

91 वर्षीय रिटायर्ड गार्ड किशनलाल शर्मा बताते हैं कि टूंडला जंक्शन उत्तर प्रदेश का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है। यह आगरा सिटी से 25 किमी दूर दिल्ली-कानपुर मुख्य लाइन पर स्थित है। टूंडला नई दिल्ली-मुगलसराय/लखनऊ सेक्शन पर लगभग सभी ट्रेनों के लिए ड्राइवर और गार्ड बदलने के लिए एक तकनीकी पड़ाव है। स्टेशन अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था और अनिवार्य रूप से अपरिवर्तित रहता है। यहां पहले स्टीम इंजन से ट्रेन चला करती थी। समय के साथ ही रेलवे की तकनीकि में काफी बदलाव हुए हैं। वह बताते हैं अंग्रेजों के समय में रेलवे स्टेशन इतना अच्छा नहीं था। प्लेटफार्म बढ़ गए हैं। ट्रेनें बढ़ गई हैं। साफ—सफाई भी बेहतर हुई है। ट्रेनें अब अधिकतर सही समय पर चलती है। आजादी के बाद से काफी बदलाव हुए हैं। पहले अधिकारी कानून मानते थे, अब नहीं मानते हैं। गार्डो की स्थिति पहले की अपेक्षा काफी अच्छी है।

1970 में टूंडला से आगरा 56 घंटे में गाड़ी लेकर पहुंचा था जो अब सपना हो गया है। वॉकी टॉकी से गार्डो की स्थिति रात की जगह दिन की हो गई है। 50—60 किलोमीटर में पानी लेना पड़ता था और टूंडला—कानपुर में कोयला भी लेना पड़ता था। इंजन भी बदलना पड़ता था। रेलवे के इतिहास को लेकर कहा कि भारतीय रेल का पहला अध्याय 16 अप्रैल 1853 में लिखा गया। जब देश की पहली यात्री ट्रेन बोरी बंदर से ठाणे के लिये चलाई गई थी। हिन्दुस्तान के बंटवारे में 40 प्रतिशत रेल नेटवर्क पाकिस्तान में चला गया। 1947 में अस्त व्यस्त, खस्ताहाल पड़ा रेलवे को जब भारत सरकार ने संभाला तब भारत के पास केवल 42 भाप संचालित ट्रेन और 32 रेलवे लाइन थीं। हिंदुस्तान में विश्व का रेल नेटवर्क के मामले में चौथा स्थान है। हमारे पास 20,000 से अधिक यात्री ट्रेन और 9200 से अधिक मालगाड़ी हैं। आज हमारे पास 121407 किलोमीटर का electrified रूट है। जिसमें से 33 प्रतिशत रूट डबल/ ट्रिपल लाइन है। भारतीय रेल विश्व की सबसे बड़ी माल वाहक और सबसे ज्यादा रोजगार देने वाली है। आज भारतीय रेल में कर्मचारियों की संख्या 19 लाख के लगभग है।