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VIDEO: तिरंगे में लिपटकर पहुंचा शहीद का शव, अंतिम संस्कार में आंखों से बह निकली अश्रुधारा

— बांग्लादेश से लगी सीमा पर शहीद हुआ था फिरोजाबाद का बीएसएफ जवान।— मांगों को लेकर परिजनों ने नहीं होने दिया अंतिम संस्कार, बाद में समझा बुझाकर कराया गया अंतिम संस्कार।

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Shaheed

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फिरोजाबाद। बांग्लादेश की सीमा पर बीएसएफ कांस्टेबल की हुई हत्या को लेकर पूरी सुहागनगरी अश्रुपूर्ण हो गई। लोगों की आंखों से आंसू बह निकले। शहीद का पार्थिव शरीर देरी से पहुंचने को लेकर परिजनों में रोष था। वहीं, परिजन मांगों को लेकर अंतिम संस्कार नहीं कर रहे थे। बाद में जन प्रतिनिधियों और डीएम के आश्वासन के बाद परिजनों ने शहीद का अंतिम संस्कार किया। बीएसएफ जवानों ने सलामी दी।

यहां हुआ था शहीद
बांग्लादेश से लगी सीमा पर शहीद हुए बीएसएफ में हेड कांस्‍टेबिल विजयभान की पार्थिव देह उनके गांव पहुंचा। फिरोजाबाद जिले के मक्‍खनपुर के चमरौली गांव में शहीद की पार्थिव पहुंचते ही कोहराम मच गया। शहीद के पार्थिव देह के देर से पहुंचने पर परिजन और ग्रामीण आक्रोशित थे। ग्रामीणों का कहना था कि जान बूझकर प्रशासन ने देरी की। मांग पूरी कराए जाने की ग्रामीणों ने मांग की। मौके पर बीजेपी विधायक डॉ मुकेश वर्मा, सपा जिलाध्‍यक्ष डीपी यादव व अन्‍य लोग भी पहुंच गए थे। तिरंगे में लिपटी शहीद की देह को सैनिकों ने सलामी दी। शवयात्रा में उमड़ी लोगों की भीड़ विजयभान अमर रहें और बांगलादेश मुर्दाबाद के नारे लगा रही है।

मुर्शीदाबाद बॉर्डर पर थे तैनात
जिला मुख्यालय से लगभग सात किमी दूर चमरौली गांव के विजयभान सिंह यादव (52) बीएसएफ में हेड कांस्टेबिल पद पर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद बांग्लादेश बार्डर पर तैनात थे। गुरुवार सुबह बांग्लादेश बार्डर गार्डस(बीजीबी) ने तीन भारतीय मछुआरों को बंधक बना लिया था। विजय भान अपनी टीम के साथ मोटरबोट से मछुआरों की तलाश को निकले थे। बीजीबी के जवान की ताबड़तोड़ फायरिंग में विजयभान शहीद हो गए। दोपहर में इसकी खबर मिलते ही यहां परिवार में कोहराम मचा गया।

तीन भाइयों में सबसे छोटे थे
बांग्लादेश बार्डर पर शहीद हुए विजयभान तीन भाइयों में सबसे छोटे थे। बड़े भाई सत्यभान फौज से रिटायर्ड हैं। दूसरे नंबर के भाई किसान है। बड़ा बेटा विवेक एयरफोर्स में तैनात है तो छोटा ग्रेजुएशन कर रहा है। विजयभान सिंह ने नया घर बनवाने के लिए शिकोहाबाद में जमीन खरीदी थी। बड़े बेटे विवेक ने बताया कि वह बंगलुरू से एक महीने की छुट्टी लेकर परिवार के साथ घर आया, लेकिन तब तक पिताजी लौट चुके थे। उन्होंने कहा था कि 26 अक्टूबर को वह वापस आएंगे। इसके बाद घर का काम शुरू कराएंगे। विजयभान के साथ उनकी 80 साल की मां फूलन देवी रहती हैं। कई घंटे तक उन्हें बताया ही नहीं गया, मगर जब घर पर चीत्कार मची और गांव की महिलाएं पहुंची तो जानकारी हो गई। करवाचौथ के दिन पति के शहीद होने की जानकारी मिलने के बाद पत्नी सुनीता देवी की हालत खराब है।

फौजियों और पुलिस के जवानों का है गांव
मक्खनपुर थाना क्षेत्र का चमरौली गांव फौजियों और पुलिस के जवानों से भी पहचाना जाता है। गांव के आठ लोग सेना में हैं वहीं 13 परिवारों के जवान यूपी पुलिस में हैं। परिवार वालों का कहना था कि विजयभान सिंह ड्यूटी पर रहते हुए शहीद हुए हैं। उनके सम्मान में गांव में शहीद स्मारक बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा कॉलेज का नामकरण भी हो।

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