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Key to Success: दादाजी को सरकारी अस्पताल में नहीं मिला था उपचार, इसलिए इंजीनियर की जगह डॉक्टर बन गए संजीव वर्मा

— सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र टूंडला के अधीक्षक डॉ. संजीव वर्मा ने बताया अपनी सफलता का राज।

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Dr. sanjeev verma

Dr. sanjeev verma

फिरोजाबाद। सफलता जीवन की कुंजी है। हर व्यक्ति के मन में एक सफल व्यक्ति होने की भावना जागृत होती है। इसके लिए हर व्यक्ति भरसक प्रयास भी करता है लेकिन सफलता हर किसी को नहीं मिलती। पत्रिका के विशेष कार्यक्रम Key to Success में आज आपको अपनी सफलता के बारे में बता रहे हैं सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र टूंडला के अधीक्षक डॉ. संजीव वर्मा—

आगरा से की एमबीबीएस की पढ़ाई
मूल रूप से एटा जिले के मारहरा गांव के रहने वाले हैं । उन्होंने बताया कि मेरे परिवार में अधिकतर लोग इंजीनियर हैं लेकिन मुझे इंजीनियर से डॉक्टर बनने के पीछे की एक कहानी है। वह बताते हैं कि उनका परिवार गांव में रहता था। मैं करीब छह साल का था मेरे दादाजी की तबियत खराब हो गई थी। उन्हें लेकर परिवार के सभी लोग एटा सरकारी अस्पताल में लेकर गए। जहां उपचार के अभाव में उनकी मौत हो गई। यह वेदना मेरे दिल में आज तक है। उसके बाद मैंने मेडिकल कॉलेज में जाने का संकल्प लिया।

अनवरत दे रहे सेवाएं
उन्होंने बताया कि 1994 में उन्होंने आगरा से मेडिकल की पढ़ाई की। जब मैं मेडिकल लाइन में आया तब मन में ख्याल आया कि कुछ समय सरकारी अस्पतालों में सेवा दूंगा और फिी अपना प्राइवेट क्लीनिक खोलकर बैठूंगा। सरकारी अस्पताल में मेरी पोस्टिंग नैनीताल में हुई। उसके बाद वहां काम करने के बाद मेरे अंदर यह भावना पैदा हुई कि अभी काफी समय तक सरकारी अस्पतालाों की सूरत बदलने के लिए मुझे समय देना है और तभी से मैं अब यहां सेवाएं दे रहा हूं। मेरा उद्देश्य है कि अस्पताल में आने वाले मरीज को यहां इलाज मिलना चाहिए। यहां वह उपचार मिलेगा यही सोचकर आता है। यदि यहां इलाज नहीं है तो उसे सही जगह पर पहुंचाने का काम करें।