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फिरोजाबाद। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा धनगर प्रमाण पत्र जारी करने के आदेश दिए जाने को लेकर क्षेत्र के समाजसेवी प्रेमपाल सिंह चक ने धनगर प्रमाण पत्र को लेकर पीएमओ से सूचना का अधिकार के तहत सूचनाएं मांगी हैं। वहीं आॅनलाइन शिकायत कर आपत्ति दर्ज की है। इसी बीच शोधकर्ता द्वारा किए गए शोध में प्रमाण पत्र को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है।
शोधकर्ता ने किया ये खुलासा
शोध अधिकारी डॉ. देवेन्द्र सिंह ने किए अपने शोध की रिपोर्ट अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति शोध एवं प्रशिक्षण संस्थान उत्तर प्रदेश गोमती नगर लखनऊ और प्रदेश सरकार के प्रमुख सचिव समाज कल्याण को भेजी है। जिसमें उन्होंने लिखा है कि अनुसूचित जाति जनजाति संशोधन आदेश संस्थान द्वारा वर्ष 2009—10 में उत्तर प्रदेश में निवासरत धांगर, धनगर जाति का सामाजिक, आर्थिक, सर्वेक्षण प्रदेश के सोनभद्र, आगरा, मथुरा, बिजनौर, अलीगढ़, मुरादाबाद जनपदों में किया गया था।
गड़रिया जाति की उपजाति नहीं है धनगर
अभिलेखीय आधार पर धनगर जाति गड़रिया उपसमूह की जाति नहीं है। गड़रिया जाति के उपसमूह निखी, धींगर, पाल, बघेल, चंदेल आइि हैं। धनगर के उपसमूह इलहा, जूर, तिरिक, बारा, लकरा, इक्का, टिग, टिगा, खाहा हैं। Dhangar का हिंदी रूपांतर धनगर नहीं है। राष्ट्रपति/भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन में Dhangar का हिंदी रूपांतरण धंगड़ है। सर्वेक्षण के मुताबिक धंगड़ जाति मिर्जापुर के कैमूर रैंज के सोनभद्र जनपद में निवास करती है जो उरांव समूह के हैं।
अलग हैं जाति
धंगड़ जातियों की अपनी संस्कृति, भाषा, विशेष अवसरों पर पहनावा, नृत्य तथा गीत गड़रिया जाति से अलग है। गड़रिया जाति की कोई उपशाखा या इन जाति के कोई भी रीति रिवाज सामाजिक स्थिति आर्थिक स्थिति धंगड़ जाति के समान नहीं है। इन दोनों जातियों में भिन्नता है। धंगड़ जाति के लोग वर्हिगोत्रीय शादी—विवाह करते हैं जबकि गड़रिया जाति के लोगों में इस प्रकार का प्रचलन नहीं है। धंगड़ आदिवासी मूल की जाति है। जिसका भौगोलिक क्षेत्र भिन्न संस्कृति तथा अन्य विशेषताएं पाई जाती हैं जबकि गड़रिया जाति के लोगों में सामान्य लोगों की भांति विशेषताएं विद्यमान हैं।
गजट की श्रेणी में नहीं आते हैं
गड़रिया जाति के लोग जो अपने को धनगर कहते हैं वह धंगड़ से भिन्न हैं। इस प्रकार भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन के अनुसार अनुसूचित जाति की श्रेणी में नहीं आते हैं। किसी भी व्यक्ति को सरनेम लिखने की पूर्ण स्वतंत्रता है। परंतु जाति प्रमाण पत्र किसी जाति या जाति का समूह या उसका भाग जो संविधान आदेश 1950 मेें विशिष्ट रूप से इन्द्राज नहीं किया गया है। उसे सामान्य रूप से शामिल किसी अनुसूचित जाति का उपजाति या भाग निरूपित करने से संबंधित जांच स्थापित करने अथवा साक्ष्य प्रस्तुत का आदेश या घोषणा करने की किसी भी स्थिति में अनुमति नहीं है। अनुसूचित जाति आदेश को वैसा ही पढ़ा जाना चाहिए जैसा वह है। ऐसा कहने की अनुमति दिए जाने योग्य नहीं है कि एक जाति, उपजाति किसी जाति अथा जाति समुदाय का भाग अथवा समूह पर्यायवाची है यदि वह जाति उक्त आदेश में विशिष्ट रूप से उल्लिखित नहीं है।
Published on:
08 Feb 2019 01:04 pm
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