
फिरोजाबाद। सरकारी तनख्वाह पाने वाले एक शिक्षक की धरपकड़ के लिए डीआईओएस ने नगर में संचालित एक निजी कोचिंग सेंटर झा क्लासेस पर छापामारी की। एक शिकायत के आधार पर छापामारी करने पहुंची डीआईओएस को देख वहां पढ़ाने वाले शिक्षक मौका देख वहां से रफूचक्कर हो गए। डीआईओएस ने इस मामले में पुन कार्रवाई की बात कही है।
निजी कोचिंग में पढडा रहा था सरकारी शिक्षक
नगर में शिक्षा विभाग की मेहरबानी से सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालयों में मोटी तनख्वाह प्राप्त कर रहे शिक्षक काॅलेज में पढ़ाने की जगह निजी कोचिंग सेंटर में पढ़ा कर मोटी कमाई कर रहे हैं। हालांकि इस संबंध में छात्रों व उनके अभिभावकों द्वारा की गईं शिकायतें सामने आतीं रहीं हैं। सफेदपोश नेताओं, काॅलेज प्रबंधन और विभागीय कर्मचारियों की सरपस्ती के कारण निजी कोचिंग में पढ़ाने वाले शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हो पाती। परिणाम स्वरूप सहायता प्राप्त विद्यालयों में दिनों दिन पढ़ाई का बंटा धार हो रहा है। सूत्रों की माने तो इस पूरे खेल में सहायता प्राप्त काॅलेज प्रधानाचार्यों की भी मिलीभगत होती है।
एमजी रोड पर की कार्रवाई
डीआईओएश रितु गोयल ने एक शिकायत के आधार पर एमजी रोड स्थित झा क्लासेस पर छापामारी की। शिकायत कर्ता ने डीआईओएस से कोंचिग सेंटर के नजदीक संचालित एक सहायता प्राप्त माध्यमिक विद्यालय में पढ़ाने वाले एक शिक्षक पर झा क्लासेस में पढ़ाने का आरोप लगाया था। शिकायत कर्ता की मानें तो शिक्षक महोदय काॅलेज में क्लास लेने की जगह काॅलेज प्रबंधन की शह पर कोचिंग सेंटर में पढ़ाने चले जाते हैं। बरहाल शिकायत के आधार पर झा क्लासेस में छापामारी करने पहुंची डीआईओएस के आने से पूर्व वहां पढाने वाला सहायता प्राप्त शिक्षण संस्था का शिक्षक वहां से भाग खड़ा हुआ। जिससे डीआईओएस को बैरंग लौटना पड़ा। खास बात यह भी है कि महज 250 छात्रों का पंजीकरण करा कोचिंग चलाई जा रही कोचिंग में प्रतिदिन लगभग एक हजार से ज्यादा छात्र पढ़ने को आते हैं। ऐसे में कोचिंग संचालन के लिए शासन द्वारा निर्धारित शुल्क में भी चोरी करने की बात सामने आ रही है।
पूर्व में खुद को फंसता देख अनिवार्य सेवा निवृति ले चुका है एक शिक्षक
झा क्लासेस के नजदीक संचालित एक अन्य कोचिंग में भी एक सहायता प्राप्त विद्यालय का शिक्षक कोचिंग पढ़ता था। लेकिन कई शिकायतों के बाद जब बात नही बनी तो उक्त शिक्षक ने प्रधानाचार्य और प्रबंधन तंत्र से सांठगांठ कर चिकित्सीय अवकाश ले लिया। लेकिन कोचिंग में निरंतर उपस्थिति के कारण उनकी पोल खुल गई। ऐसे में दबाव पड़ा तो शिक्षक महोदय ने अनिवार्य सेवा निवृति लेकर अपना पिंड छुड़ा लिया। इस मामले में डीआईओएस रितु गोयल का कहना है कि तिलक विद्यालय इंटर काॅलेज में पढ़ाने वाले एक शिक्षक के विरूद्व काॅलेज समय में निजी कोचिंग में पढ़ाने की शिकायत मिली थी। जांच के दौरान शिक्षक मौके पर नहीं मिले। संभवत; मौका देख वे वहां से खिसक गए। विभागीय कर्मचारियों की मिली भगत से भी इंकार नहीं किया जा सकता।
Published on:
5 May 2018, 3:16 PM IST
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