
धार्मिक शिक्षा के नाम पर गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं दे रहे स्कूल
रेशु जैन/सागर. शिक्षा के अधिकार (आरटीई) के तहत गरीब अपने बच्चों को निजी स्कूल में पढ़ाने से कतरा रहे हैं। प्रदेशभर में मिशनरी और अल्पसंख्यक के नाम पर बड़े निजी स्कूलों में आरटीई के तहत विद्यार्थियों को प्रवेश ही नहीं दिया जा रहा है। जिले में वर्तमान में १२ एेसी निजली स्कूलों में गरीब बच्चों को प्रवेश देना बंद कर दिया है। ये वे स्कूल हैं जो दीनी तालीम देने की बात कहकर सरकार को ही चूना लगा रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के मुताबिक धार्मिक शिक्षा देने वाले स्कूल में गरीब बच्चों को प्रवेश देना अनिवार्य नहीं है, लेकिन जिले में सामान्य शिक्षा नीति पर चलने वाले स्कूल भी विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दे रहे हैं।
फीस बचा रहे हैं
आटीई के तहत निजी स्कूलों में २५ प्रतिशत गरीब बच्चों को प्रवेश दिया जाना आवश्यक है। सरकार एक बच्चे पर साल में ४४०० रुपए खर्च करती है। जिले के अधिकांश निजी स्कूल की सलाना फीस १० से २० हजार रुपए है। इस स्थिति में निजी स्कूलों को हर माह आरटीई के विद्यार्थियों के लिए २ से ४ लाख रुपए खर्च करने होते हैं, यही फीस बचाने के लिए स्कूल प्रबंधन गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं देना चाहते हैं।
करते हैं शाख बचाने की बात
आटीई के तहत गरीब बच्चों को सभी निजी स्कूलों में पढ़ाई करने की पात्रता है। सूत्रों की मानें तो मिशनरी और अल्पसंख्यक स्कूल अपनी शाख बचाने के लिए गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं देना चाहते हैं। इनके संचालकों का कहना होता है कि गरीब बच्चों का रिजल्ट सही नहीं आता है। इससे हमारे स्कूल की शाख खराब होती है। यह भी वजह है कि ये स्कूल गरीब बच्चों को नहीं पढ़ाना चाहते हैं।
ये हैं नियम
अल्पसंख्यक के दायरे में स्कूल संचालक अल्पसंख्यक आयोग नई दिल्ली को आवेदन करते हैं और राज्य से भी अल्पसंख्यक होने की मान्यता लेते हैं। नियम के मुताबिक वही स्कूल अल्पसंख्यक हैं, जिस स्कूल में अल्पसंख्यक बच्चे ही पढ़ाई कर रहे हों और उनमें धार्मिक शिक्षा दी जा रही हो। यदि अल्पसंख्यक बच्चों की संख्या अधिक है तो फिर आरटीई के तहत प्रवेश देना आवश्यक नहीं रहता है। यहां चौंकाने वाली बात यह है कि जिले के जो स्कूल अल्पसंख्यक के दायरे में आते हैं, उनमें सभी समुदाय के बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं और सामान्य शिक्षा दी जा रही है। साथ ही मिशनरी स्कूलों में कोई दीनी तालीम नहीं दी जा रही है उसके बाद भी यहां गरीब बच्चों को प्रवेश नहीं मिल रहा है।
इन स्कूलों में नहीं मिल रहा है प्रवेश
बंडा सेंट जोसफ, बीना निर्मल ज्योत, देवरी सेंट मेरी स्कूल, खुरई होली फैमिली सीनियर सेकंडरी स्कूल, कॉन्वेंट स्कूल, ज्ञानोदय विद्यालय, राहतगढ़ सेंट थामस, रहली क्राइस कॉन्वेंट स्कूल पटना बुजुर्ग, सागर सेंट जोसफ कॉन्वेंट, सेंट मैरी, पारस विद्या बिहार, ब्लू बेल्स
जिन स्कूलों में अल्पसंख्यक बच्चे पढ़ रहे हैं, उन्हें प्रवेश देना आवश्यक नहीं है। जिन स्कूलों में प्रवेश मिलता है उनकी संख्या पोर्टल पर है।
महेश जैन बिलहरा, स्कूल संचालक
अल्पसंख्यक स्कूल वही है जिसमें धार्मिक शिक्षा दी जाए। ऐसे स्कूलों के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गरीब बच्चों को नहीं पढ़ाने की छूट दी गई है।
धमेन्द्र शर्मा, स्कूल संचालक
आरटीई के निमयों के उलंघन कर रहे स्कूलों पर संज्ञान में लिया है। अभी मैं अवकाश पर हूं। लौटते ही इन स्कूलों पर कार्रवाई की जाएगी।
संतोष शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी
Published on:
05 May 2018 11:32 am
बड़ी खबरें
View Allसागर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
