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जीएसटी से चौपट हो गया कांच कारोबार, अभी तक नहीं उबर सका बाजार

जीएसटी लगने के बाद से व्यापारी वर्ग हो रहा परेशान
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फिरोजाबाद। भारत सरकार द्वारा जीएसटी वस्तु एवं सेवा कर को एक साल पूरा हो गया। व्यापारी वर्ग अभी भी जीएसटी को लेकर असमंजस की स्थिति में है। जीएसटी लगने के बाद से ही सुहागनगरी के अंदर व्यापारियों ने इसके अंदर संशोधन की मांग उठाई थी। समय-समय पर व्यापारियों द्वारा जीएसटी संशोधन को लेकर मांग की गई और ज्ञापन भी दिए गए। विगत एक वर्ष के अंदर सुहागनगरी में कांच करोबार काफी प्रभावित हुआ है। कई कांच इकाइयां बंद भी हो गईं।

कांच उत्पादों पर पड़ा असर
उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के महानगर अध्यक्ष अंबेश शर्मा कहते हैं कि जीएसटी का असर कांच के उत्पादों पर भी पडा है। जीएसटी में काफी कमियां हैं। जिनके सुधार के लिए डीएम से लेकर आला अधिकारियों से मिल चुके हैं। इसके बाद भी जीएसटी में कोई सुधार नहीं हो पा रहा है। जीएसटी की तकनीकियोें के बारे में अभी तक व्यापारी वर्ग पूरी तरह से नहीं जान सका है।

हुई छापेमार कार्रवाई
जीएसटी लगने के बाद सुहागनगरी की कांच इकाइयोें में बडे स्तर पर छापेमारी की गई। छोटी इकाइयों से लेकर बडे कारखाने दारों पर टैक्स की छापेमारी की गई। छापेमारी के बाद करीब 20 से अधिक छोटी इकाइयां बंद हो गई। इकाइयां बंद होने के बाद गोदाम के सहारे काम किया जा रहा है। नगर अध्यक्ष मनोज धाकरे का कहना है कि जीएसटी से मध्यम वर्गीय व्यापारी काफी प्रभावित हुआ है। जीएसटी ने व्यापारी वर्ग को तोडकर रख दिया है।

नहीं मिल रहे रिफंड़
जीएसटी लागू करते समय ये कहा गया था कि रिफंड समय पर मिल जाएंगे। अतिरिक्त टैक्स का अधिकतर हिस्सा प्रक्रिया पूरी करने सात दिन के अंदर मिल जाएगा। लेकिन, ये दावा कामयाब नहीं रहा और पूंजी अटक गई। कांच कारोबार सेे लेकर आम व्यापारी वर्ग भी इस जीएसटी के फेर में फंस गया। जीएसटी को समझने के लिए कारोबारियों को अच्छी खासी मेहनत करनी पड़ी। इसका नतीजा ये हुआ कि आगरा में मोतीगंज में किराने का काम करने वाले एक युवक ने अवसाद में आकर खुदकुशी तक कर ली। कारोबारियों में इस बात को लेकर आज भी उबाल है।

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