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नहर से निकलकर गांव में पहुंचा विशालकाय मगरमच्छ, 17 घंटे तक दहशत में रहे ग्रामीण

Crocodile in Village: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के एक गांव में विशालकाय मगरमच्छ को देखकर ग्रामीणों में भगदड़ मच गई। सूचना पर पहुंची वन विभाग और एसओएस वाइल्डलाइफ की टीम ने 17 घंटे मशक्कत के बाद उसे रेस्‍क्यू किया।

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Crocodile in Firozabad: यूपी के फिरोजाबाद जिले में खड़ीत नहर से निकला विशालकाय मगरमच्छ पांच किलोमीटर दूर स्थित जसराना थानाक्षेत्र के गांव ईसागढ़ में पहुंच गया। आधी रात में गांव में घूम रहे विशालकाय मगरमच्छ को देखकर ग्रामीण दहशत में आ गए। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। सूचना मिलने पर वन विभाग और आगरा से एसओएस वाइल्ड लाइफ की टीम गांव पहुंची। जहां 17 घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद मगरमच्छ को रेस्‍क्यू किया गया। टीम मगरमच्छ को पकड़कर अपने साथ ले गई है।

दरअसल, फिरोजाबाद जिले के जसराना थाना क्षेत्र के गांव ईसागढ़ में बीती रात ग्रामीणों ने एक विशालकाय मगरमच्छ को गांव की गलियों में घूमते देखा। इसकी सूचना से पूरे गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया। इसी बीच किसी ग्रामीण ने वन विभाग को मामले की सूचना दी। इसके साथ ही ग्रामीणों ने मगरमच्छ की घेराबंदी कर ली। जानकारी मिली तो क्षेत्रीय वन अधिकारी आशीष कुमार, वन दरोगा संदीप यादव, वन दरोगा सुधीर शर्मा, वनरक्षक संदीप मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि मगरमच्छ की लंबाई सात फीट है।


ग्रामीणों की सूचना पर क्षेत्रीय वन अधिकारी आशीष कुमार ने ग्रामीणों से घरों में रहने की अपील की। इसके बाद क्षेत्रीय वन अधिकारी ने पूरे मामले से आगरा में एसओएस की टीम को अवगत कराया। सूचना मिलने पर आगरा से एसओएस की एक टीम गांव पहुंची और ग्रामीणों की मदद से रेस्क्यू कर मगरमच्छ को पिंजरे में बंद कर लिया। इस दौरान 17 घंटे तक गांव में दहशत बनी रही। क्षेत्रीय वन अधिकारी आशीष कुमार ने बताया कि वन विभाग और एसओएस वाइल्ड लाइफ की टीम ने मगरमच्छ को रेस्क्यू के दौरान पकड़ लिया है। उसे उचित स्‍थान पर छोड़ा जाएगा।

वाइल्डलाइफ एसओएस के डायरेक्टर कंज़रवेशन प्रोजेक्ट्स, बैजूराज एमवी और संस्‍था के सह-संस्थापक और सीईओ कार्तिक सत्यनारायण ने बताया “मगरमच्छ को मार्श क्रोकोडाइल के नाम से भी जाना जाता है। यह भारतीय उपमहाद्वीप, श्रीलंका, बर्मा, पाकिस्तान और ईरान के कुछ हिस्सों में पाए जाते हैं। यह आमतौर पर मीठे पानी जैसे नदी, झील, पहाड़ी झरने, तालाब और मानव निर्मित जलाशयों में रहते हैं। इन्हें वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित किया गया है।