
Mouth Blowing factory
पत्रिका न्यूज नेटवर्क
फिरोजाबाद। ऑक्सीजन संकट का असर अब फिरोजाबाद के कारखानों में भी देखने को मिल रहा है। ऑक्सीजन कमी के चलते कारखानों में अब तक 10 करोड़ से अधिक का नुकसान हो चुका है। कारखानों में काम न होने के कारण मजदूर भी बेरोजगार हो गए हैं।
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कई प्रांतों में भेजे जाते हैं आयटम
चूड़ियों की कटाई के साथ ही माउथ ब्लोइंग कारखानों में बनने वाले उत्पादों के लिए ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजन के अभाव में कई कारखानों में काम नहीं हो पा रहा है। डीएम फिरोजाबाद ने कारखानों को मिलने वाली ऑक्सीजन को अस्पतालों में देने के निर्देश दिए हैं। उसके बाद से कारखानों में कामकाज बंद पड़ा है। हस्तशिल्प (हाथों से तैयार उत्पाद) और माउथ ब्लोइंग (मुंह से फूंक मारकर तैयार होने वाले उत्पाद) तैयार करने में ऑक्सीजन की काफी खपत होती है। ऐसे में ऑक्सीजन न मिलने के कारण उत्पाद तैयार नहीं हो पा रहे हैं।
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ऑक्सीजन की हो रही लगातार मांग
कारोबारी अतुल कुमार बताते हैं कि माउथ ब्लोइंग कारखानों में कांच की मूर्तियां और खेल खिलौने तैयार किए जाते हैं। इन्हें डिमांड पर दूसरे प्रांतों में भेजा जाता है। हस्तशिल्प और माउथ ब्लोइंग कारखानों में करीब दो लाख मजदूर काम करते हैं। इस समय ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे कांच कारोबार में कामकाज ठप सा हो गया है। इसके चलते इस काम से जुड़े लोग बेरोजगार हो गए हैं। यहां काम करने वाले मजदूरों को दिहाड़ी (दिन के हिसाब) से मेहनताना मिलता है। ऑक्सीजन के लिए लगातार मांग की जा रही है।
Published on:
20 May 2021 06:00 pm
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