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फिरोजाबाद। एक समय था जब सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चे ऊंचा मुकाम हासिल करते थे। शिक्षकों का उद्देश्य केवल छात्र—छात्राओं को शिक्षित बनाना था लेकिन बदलते समय के साथ शिक्षकों की सोच भी बदल गई। सरकारी स्कूलों में आने वाले बच्चे अब शिक्षा ग्रहण करने नहीं बल्कि स्कूलों में काम करने के लिए आते हैं। सरकारी स्कूल में कोई बच्चा झाडू लगाता है तो कोई बर्तन मांजता हुआ नजर आता है। हद तो तब हो गई जब सफाई कर्मचारी शौचालय साफ करने के लिए पानी भी बच्चों से भरवाता है।
अंदर थे अधिकारी, बच्चा उठा रहा था जूते
उच्च प्राथमिक विद्यालय जाजपुर में स्मार्ट क्लास को लेकर ट्रेनिंग चल रही थी। बीएसए समेत अन्य अधिकारी अंदर प्रशिक्षण में बैठे थे। उसी समय एक छात्र हाथों में झाडू लगाकर कमरे के बाहर झाडू लगा रहा था। अधिकारियों के जूते—चप्पलों को उठा रहा था। जूते—चप्पल उठाने का दृश्य कैमरे में कैद हो गया।
उसायनी में भर रहा था पानी
प्राथमिक विद्यालय उसायनी का शौचालय काफी गंदा पड़ा था। सफाई कर्मचारी जब शौचालय की सफाई करने पहुंचा तो स्कूल का हैंडपंप खराब था। विद्यालय में पानी की व्यवस्था न होने के कारण शिक्षिका और सफाई कर्मचारी ने बच्चे को पानी लाने के लिए गांव भेज दिया। क्लास छोड़कर बालक बाल्टी में गांव से पानी भरकर लाया। तब शौचालय की सफाई की जा सकी।
क्या यही है देश का भविष्य
परिषदीय विद्यालयों में बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाने और उनके बैठने के लिए उचित प्रबंध सरकार द्वारा किए गए हैं लेकिन शिक्षकों की लापरवाही के चलते बच्चों का भविष्य अंधकार में डूब रहा है। शिक्षा अधिकारियों द्वारा भी इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा। शायद इसलिए कोई भी अभिभावक अब अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में भेजना पसंद नहीं करता है।
Updated on:
30 Nov 2018 11:08 am
Published on:
30 Nov 2018 11:01 am
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