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फिरोजाबाद। आईएमए की देशव्यापी हड़ताल का असर जिले में भी दिखा दिया। शहर के कई चिकित्सकों के क्लीनिक बंद रहे। इस संबंध में यूनिटी हास्पीटल में आईएमए की बैठक हुई, जिसमें चिकित्सकों ने बताया कि आईएमए यूपी द्वारा नेशनल मेडिकल कमीशन बिल का विरोध करते हुये इस बिल को पूर्णतः अलोकतांत्रिक गरीबों के विरूद्ध, संघीय विरोधी, पिछड़ा समुदाय विरोधी एवं अमीरों को रास आने वाला बताया गया है। इस बिल के माध्यम से भारत सरकार के समस्त अधिकारों को केंद्रीयकृत करने का इरादा स्पष्ट दिखाई देता है।
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किया गया विरोध
लोकतांत्रिक तरीके से चुने हुये एमसीआई को समाप्त कर राष्ट्र चिकित्सा आयोग का गठन पूर्णतः अलोकतांत्रिक है, जिसमें राज्य चिकित्सा का प्रतिनिधित्व पूर्ण रूप से हाशिए पर कर दिया गया है। इसमें तीन की जगह 10 सदस्यों को समूहबद्ध किये जाने की सिफारिश को भी अस्वीकार किया गया है, जिसमें राज्य का प्रतिनिधित्व दस वर्षो की अवधि के लिये अप्रतिनिधित रहेगा। उन्होंने बताया कि यह स्पष्ट है कि मौजूदा स्नाकोत्तर नीट परीक्षा में सामाजिक आर्थिक कमजोर वर्ग के छात्रों का प्रदर्शन कमजोर रहा है।
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परीक्षार्थियों का होगा नुकसान
एग्जिट टेस्ट के रूप में अंकित एमबीबीएस परीक्षा का उपयोग विभिन्न कारणों से गरीब व पिछड़े समुदायों के छात्रों के लिये दुष्कर होगा। जिसके परिणामस्वरूप संबंधित राज्य चिकित्सा परिषदों के साथ पंजीकृत नहीं हो पायेंगे। इसलिए उपरोक्त समस्त कारणों के बावजूद यह बिल पास होता है तो आईएमए देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिये बाध्य होगा। साथ ही समस्त चिकित्सा जगत पूरे देश में अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने के लिये बाध्य होगा। जिसकी सम्पूर्ण जिम्मेदारी भारत सरकार की होगी। बैठक में आईएमए के अध्यक्ष डा. दीपक गुप्ता, कोषाध्यक्ष डा. जलज गुप्ता, सचिव डा. विवेक अग्रवाल, डा. पंकज अग्रवाल संग काफी संख्या में चिकित्सक मौजूद रहे।
Published on:
29 Jul 2018 05:45 pm
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