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अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र के मामले में कैबिनेट मंत्री की बढ़ी मुश्किलें, 15 जनवरी को हाईकोर्ट करेगा सुनवाई

यूपी कैबिनेट मंत्री एसपी सिंह बघेल पर पिछड़ी जाति का होने के बावजूद अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाणपत्र बनवाने व उसी सीट पर चुनाव लड़ने का आरोप है।

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फिरोजाबाद। योगी सरकार में कैबिनेट मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। वर्ष 2016 में बने अनुसूचित जाति के प्रमाण पत्र को लेकर अब कोर्ट ने भी सख्त निर्देश दिए हैं। सर्टिफिकेट को लेकर दाखिल की गई याचिका का संज्ञान लेते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कैबिनेट मंत्री के प्रमाण पत्र के मामले में 15 जनवरी को सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं।

इन्होंने की थी शिकायत
टूंडला निवासी प्रेमपाल सिंह चक ने 24 अप्रैल 2017 में कैबिनेट मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल के खिलाफ चुनाव याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की थी। मामले को लेकर 26 मई 2017 को समाचार पत्रों में प्रकाशन कराया गया था। 18 अगस्त को पहली सुनवाई में कैबिनेट मंत्री के वकील सुशील कुमार श्रीवास्तव ने वकालतनामा दाखिल कर दिया था। उसके बाद से कैबिनेट मंत्री के वकील लगातार बीमारी का प्रार्थना पत्र देकर सुनवाई टालते रहे। मामले को लेकर अभी तक कोर्ट में जवाब दाखिल नहीं कराया गया है।

कोर्ट ने दिखाई सख्ती
11 दिसंबर 2017 को न्यायमूर्ति महेश चन्द्र त्रिपाठी की खंडपीठ ने मामले में गंभीरता दिखाते हुए अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र के मामले को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार को निर्देश दिए हैं कि वह मंत्री को नोटिस तामील कराएं। जिससे वह कोर्ट में सुनवाई के लिए पहुंच सकें।

ये है मामला
टूंडला निवासी प्रेमपाल सिंह का आरोप है कि एसपी सिंह बघेल पिछड़ी जाति के हैं। जबकि टूंडला विधानसभा क्षेत्र अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। अब तक वे संसदीय चुनाव लड़ते रहे हैं। टूंडला से चुनाव लड़ने के लिए एसपी सिंह बघेल ने अनुसूचित जाति धांगड़ (धनगर) का प्रमाणपत्र आगरा से बनवा लिया। टूंडला विधानसभा क्षेत्र से उनकी जीत हुई। इस समय वे योगी आदित्यनाथ की सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं।

औरैया जिले के निवासी हैं कैबिनेट मंत्री
कैबिनेट मंत्री प्रो.एसपी सिंह बघेल औरेया जिले के बटपुरा गांव के मूल निवासी हैं। वहां इनका पूरा परिवार आज भी निवास करता है। इनके सगे भाई बृजराज सिंह ने तहसील सदर औरैया में धनगर प्रार्थना पत्र के लिए आवेदन किया था, इस दौरान तहसीलदार द्वारा जांच में पाया गया कि वे गड़रिया जाति के हैं, इसलिए आवेदन निरस्त कर दिया गया था। इसके बाद बृजराज सिंह ने तहसील दिवस में भी धनगर प्रमाण पत्र बनवाने के लिए शिकायत की, लेकिन धनगर प्रमाण पत्र नहीं बनाया गया। प्रशासन का दावा है कि यह गड़रिया जाति के हैं। इसके बाद बृजराज सिंह द्वारा धनगर प्रमाण पत्र बनवाने के लिए उच्च न्यायालय इलाहाबाद में रिट याचिका संख्या 284--15 दाखिल की गई। जो अभी तक विचाराधीन है।