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पब्लिक कनेक्ट : जानिए क्या होता है नगर निगम का काम और मेयर के दायित्व!

वर्ष 2017 में फिरोजाबाद में पहली बार नगर निगम चुनाव हुआ है, ऐसे में जनता को नगर निगम और मेयर के दायित्वों की जानकारी होना जरूरी है।

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nagar niagm

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फिरोजाबाद। वर्ष 2017 में पहली बार नगर निगम का दर्जा प्राप्त करने वाले फिरोजाबाद का इतिहास काफी पुराना है। आगरा गजेटियर 1965 के पृष्ठ संख्या 263 के अनुसार फिरोजाबाद नगर पालिका की स्थापना वर्ष 1868 में प्रारम्भ हुई थी। अनेक वर्षों तक जुवान्त मजिस्ट्रेट इसके अध्यक्ष हुआ करते थे। उस समय पुलिस की व्यवस्था भी नगर पालिका के अंतर्गत आती थी।

आगरा जिले की तहसील के रूप में पहचान रखने वाला फिरोजाबाद पांच फरवरी 1989 को जिला बना था। लेकिन तब भी यहां नगर पालिका ही रही। 29 नवम्बर 2017 में पहली बार यहां नगर निगम के लिए चुनाव हुआ और 12 दिसंबर 2017 को शपथ ग्रहण करने के बाद समाज सेविका नूतन राठौर पुत्री मंगल सिंह राठौर नगर निगम फिरोजाबाद की पहली महापौर बनीं। नगरपालिका परिषद के अंतिम अध्यक्ष राकेश दिवाकर रहे।

पहली बार नगर निगम बनने के कारण फिरोजाबाद के अधिकतर लोग ये नहीं जानते कि नगर निगम किस तरह काम करता है। महापौर और नगर आयुक्त के क्या अधिकार होते हैं। लोगों की मांग को देखते हुए आज हम आपको बताएंगे कि नगर निगम में किस प्रकार काम होते हैं और कितने वर्ष तक इनका कार्यकाल होता है। जानते हैं नगर निगम से जुडी रोचक बातें-

पांच वर्ष का होता है मेयर का कार्यकाल
नगर निगम के लिए चुने गए मेयर का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। मेयर का चुनाव जनता द्वारा किया जाता है। नियम-कानून के तहत इनके अधिकार सीमित होते हैं। शहर का प्रथम नागरिक होने के नाते इनका ओहदा ऊंचा होता है। मेयर नगर निगम के स्पीकर होते हैं। मेयर की सहमति से निगम परिषद की बैठक होती है। इस बैठक में तय एजेंडे पर निर्णय लिए जाते हैं। मेयर इन कौंसिल का कार्यकाल मेयर के विवेक पर निर्भर करता है। नगर निगम में मेयर का मंत्रिमंडल गठित होता है, मेयर इसके सभापति होते हैं। इसमें न्यूनतम पांच और अधिकतम 11 सदस्य शामिल होते हैं, जिन्हें विभिन्न समितियों का प्रभारी बनाया जाता है। इस बार नगर निगम में 70 पार्षद हैं।

ये करते हैं नगर आयुक्त
नगर आयुक्त सरकारी अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं। आयुक्त भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी होते हैं। इन्हें नगर निगम के अमले का प्रशासनिक मुखिया भी कहा जाता है। शासन से मिलने वाले आदेशों और निर्णयों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी इन्हीं की होती है। उपायुक्त प्रशासनिक नियंत्रण के लिए जोन व्यवस्था के रूप में कार्य करते हैं। आयुक्त के अधीन काम करते हैं और उनके द्वारा सौंपे गए दायित्वों को पूरा करने की जिम्मेदारी इन्हीं की है। कुछ अधिकारी राज्य प्रशासनिक सेवा के भी होते हैं।

ये होते हैं मेयर के अधिकार
तीन लाख से अधिक आबादी वाले नगर निगमों में महापौर परिषद सीधे तौर पर 15 लाख रुपए तक की लागत के कार्यों के लिए मंजूरी दे सकते हैं। तीन लाख से कम आबादी वाले शहरों के लिए यह सीमा 10 लाख रुपए तक है। नगर निगम कमिश्नर को पांच लाख तक के कार्यों की स्वीकृति का वित्तीय अधिकार प्राप्त है। इससे अधिक राशि के प्रस्तावों के लिए उन्हें महापौर परिषद से अनुमोदन प्राप्त करना होता है। मेयर अपनी कैबिनेट यानी मेयर इन काउंसिल (एमआईसी) का गठन करते हैं। निगम अध्यक्ष कार्य करने में असमर्थ हो तो महापौर कभी भी विशेष सम्मेलन बुला सकते हैं। अपने कार्यालय के अमले पर प्रशासकीय नियंत्रण होता है। महामारी या आपदा की स्थिति में ऐसे काम के लिए निर्देश दे सकते हैं जो तत्काल जरूरी हों। कई मामलों में मेयर को मेयर इन कौंसिल अपने अधिकार भी सौंप सकती है।

इस तरह करवाते हैं काम
महापौर, एमआईसी या निगम परिषद द्वारा लिए जाने वाले निर्णयों के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी नगर निगम आयुक्त की रहती है। महापौर अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाले कार्य का प्रस्ताव बनाकर बोर्ड़ की मीटिंग में प्रस्तुत कर नगर आयुक्त को सौंपते हैं। आयुक्त द्वारा प्रस्ताव के मुताबिक उस पर अमल प्रक्रिया शुरू की जाती है। अब शासन ने आयुक्त को अधिकारिता के मुताबिक कलेक्टर या शासन को सीधे प्रस्ताव भेजने की छूट भी दे दी है। शासन कानून में नगर निगम की जिम्मेदारियों के रूप में अनिवार्य व विवेकाधीन कर्तव्यों का उल्लेख है। हालांकि अधिनियम में यह भी साफ किया गया है कि इन कर्तव्यों का पालन नहीं करने पर निगम के किसी पदाधिकारी या पार्षद से क्षतिपूर्ति नहीं मांगी जा सकती। न ही उनके खिलाफ अदालत में कोई वाद दायर किया जा सकता है। मुखिया के नाते नगर निगम की जिम्मेदारियों को पूरा करवाना महापौर का दायित्व है।

निगम को हर हाल में करने होते हैं ये काम
वार्डों में साफ-सफाई के इंतजाम करवाना, सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था, पानी सप्लाई की व्यवस्था सुनिश्चित करना, बिल्डिंग बनाने की अनुमति देना, आग बुझाने के लिए फायर ब्रिगेड की व्यवस्था, कांजी हाउस की स्थापना और संचालन, खतरनाक भवनों को सुरक्षित करना या हटाना, एंबुलेंस सेवा को व्यवस्थित रखना, सड़कों का नामकरण और घरों की नंबरिंग करना, शहर में गार्डन और बगीचों का रख रखाव करना, सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध करवाना आदि हैं।