
Seeta mata
फिरोजाबाद। सीता ने वो सुनहरा मृग देखा। उस पर वह मोहित हो गयीं। लगा यह सुंदर प्राणी मेरे पास होना चाहिए। उन्होंने विचार किया कि इसे लाना श्रीराम के लिये कोई बड़ी बात नहीं होगी और श्रीराम को जाने दिया उसे पकड़ने के लिए। पल भर भी नहीं सोचा कि इसके आगे क्या परिणाम हो सकता है। हम इस समय वैराग्य जीवन में हैं इसकी विस्मृति हो गयी। यह था पहला 'मोह' का वार......फिर और आगे अलबेली रही कि लक्ष्मण रेखा को पार कर दिया। यह सोचकर साधु को दान देना तो अच्छी बात है इसमें लक्ष्मण रेखा पार करने में क्या हर्ज।
अधिक मोह ने बढ़ा दी परेशानी
नियमों के परे जाना और मोह को बढ़ाना माता सीता के लिए परेशानी खड़ी करने वाला बन गया। नतीजन, रावण की कैद....श्रीराम से असहनीय दूरी...पश्चाताप के आंसू....फिर सीता को छुड़ाने के लिए राम को भी कितनी मेहनत करनी पड़ी...क्या क्या हुआ आगे। सभी जानते हैं। अपने इच्छाओं पर संयम रखना चाहिए।
भावार्थः-
आज हम आत्मारूपी सीता के सामने भी मोहमाया .......इस कलियुगी जंगल मे बहुत सुनहरे रूप में आई है। हमें अपने परमात्मा राम से दूर करने के लिए...इस अलौकिक जीवन की, ज्ञान की विस्मृति कराने....... मोह, अलबेलापन, परमत, मनमत, आलस्य के माया-विकारों के रूप में। पल भर की मोह में फंसकर हम अपनी लक्ष्मण रेखा को पार कर देते हैं। इसलिए अपने विचार, इच्छाओं को न बढ़ने दें। तभी जीवन में सुख और शांति बनी रह सकती है।
Published on:
03 Jan 2020 07:51 am

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