
Brahmkumari
फिरोजाबाद। ब्रह्माकुमारी सेवा केन्द्र रामनगर पर प्रजापिता ब्रह्मा बाबा का जन्मदिवस बड़ी ही धूमधाम के साथ मनाया गया। उनके जीवन के वृतांत के साथ ही व्यक्ति के जीवन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला गया।
केन्द्र प्रभारी विजय बहन ने दादा लेखराज से प्रजापिता ब्रह्मा बाबा तक के अलौकिक सफर का वृतांत बताते हुए कहा कि संस्थापक पिता ब्रह्मा के नाम से आज हर कोई परिचित है। सन् 1937 से सन 1969 तक उन्होंने तपस्या की। उनका जन्म हैदराबाद सिंध में 15 दिसंबर 1876 को एक साधारण परिवार में हुआ था उनका शारीरिक नाम दादा लेखराज था। उनके अलौकिक पिता निकट के गांव में एक स्कूल के मुख्याध्यापक थे।
प्रतिभा के धनी थे
दादा लेखराज अपनी विशेष बौद्धिक प्रतिभा व्यवहार कुशलता व्यवहारिक शिष्टता अथक परिश्रम सुरेश प्रभाव एवं जवाहरात की अचूक के बल पर सफल व प्रसिद्ध जवाहरी बने। उनका मुख्य व्यापारिक केंद्र कोलकाता में था। 90 वर्ष की आयु में भी वह धीमी आवाज भी सुन सकते थे, पहाड़ों पर चढ़ सकते थे। वाराणसी में वह एक मित्र के यहां वाटिका में ध्यान अवस्था में थे। तब उन्हें परमपिता परमात्मा ज्योतिर्लिंग शिव का साक्षात्कार हुआ। प्रतिभा उपाध्याय ने इस सेवा कार्य में लगीं बहनों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके त्याग और बलिदान के चलते ही उन्हें यह मुकाम प्राप्त हुआ है।
व्यापार से निकालते थे समय
जब दादा लगभग 60 वर्ष के थे तब उनका मन भक्ति की ओर अधिक जोगिया वे अपने व्यापारिक जीवन से अवकाश निकालकर ईश्वरी मनन चिंतन में लवलीन तथा अंतर्मुखी होते गए अनायास ही एक बार उन्हें विष्णु चतुर्भुज का साक्षात्कार हुआ। एक दिन दादा अनायास ही सभा से उठकर अपने कमरे में जा बैठे और एकाग्र चित्त हो गए तब उनके जीवन का सबसे महत्वपूर्ण वृत्तांत हुआ उसकी धर्मपत्नी व बहू ने देखा कि दादा के नेत्रों में इतनी थी कि जैसे उनके अंदर कोई लाल बत्ती जग गई हो दादा का कमरा भी प्रकाश में हो गया था इतने में एक आवाज ऊपर से आती हुई मालूम हुई जैसे कि दादा के मुख से दूसरा कोई बोल रहा है आवाज के यह शब्द से निजानंद स्वरूप शिवोहम शिवोहम ज्ञान स्वरूप शिवोहम शिवोहम प्रकाश स्वरूप शिवोहम शिवोहम फिर दादा के नेत्र बंद हो गए। इस मौके पर राधिका बहन, तनु बहन, ममता बहन, राजू भाई, दुर्ग सिंह, फुलवर सिंह, बैजनाथ आदि मौजूद रहे।
Published on:
16 Dec 2019 02:48 pm

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