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विधायक पिता के जेल जाते ही बेटे पर गिरी गाज, पांच साल तक नहीं लड़ सकेंगे चुनाव

विधायक हरिओम यादव के बेटे विजय प्रताप पर जिला पंचायत अध्यक्ष पद का दुरुपयोग करने के आरोप है। शासन ने उनके चुनाव लड़ने पर पांच साल का प्रतिबंध लगाया है

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 vijay pratap

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फिरोजाबाद। उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन होने के साथ ही अपराधियों पर शिकंजा कसना शुरू हो गया है। राजनैतिक दल भी इससे अछूते नहीं रहे। राजनैतिक दलों के पूर्व में किए गए मामलों की कलई भी धीरे धीरे खुलना शुरू हो गई है। इसी कड़ी में पहले सिरसागंज विधायक हरीओम यादव जेल भेजे गए। उसके बाद उनके पुत्र विजय प्रताप पर भी शिकंजा कसना शुरू हो गया है। गड़बड़ी करने के आरोप में शासन ने विधायक के पुत्र पर पांच साल तक चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगा दिया है।

करोड़ों की धनराशि में मनमानी का आरोप
दरअसल सपा सरकार के कार्यकाल के दौरान सिरसागंज विधायक हरीओम यादव ने अपने पुत्र विजय प्रताप उर्फ छोटू को जिला पंचायत अध्यक्ष बनवाया था। आरोप है कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए छोटू ने विधानसभा चुनाव से पहले मनमाने ढंग से करोड़ों रूपए खर्च कर दिए। इस मामले को लेकर जिला पंचायत सदस्य मंजू देवी ने शपथपत्र के माध्यम से शासन से शिकायत की थी। शिकायत के आधार पर मामले की जांच शुरू हुई।

सत्ता परिवर्तन होते ही आ गया अविश्वास प्रस्ताव
प्रदेश में भाजपा सरकार बनने के साथ ही प्रमुख पदों पर बैठे सपाइयों के विरोध में भाजपाइयों ने अविश्वास प्रस्ताव लाना शुरू कर दिया। सपाइयों ने जिला पंचायत अध्यक्ष के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव पारित करा दिया। इसके लिए विधायक और उनके पुत्र ने हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन राहत नहीं मिली। उसके बाद सुप्रीम कोर्ट गए, लेकिन वहां भी राहत नहीं मिली। हत्या के प्रयास के मामले में सिरसागंज विधायक हरिओम यादव ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया जिसके बाद कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया। वहीं उनके पुत्र ने गुरूवार आज सरेंडर करने की अर्जी कोर्ट में दी है। इसी बीच शासन ने विजय प्रताप उर्फ छोटू को जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर रहते हुए पद का दुरुपयोग कर मनमाने तरीके से अपने पिता के विधानसभा क्षेत्र में विकास कराने के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। साथ ही उन्हें पांच साल तक चुनाव लड़ने के लिए प्रतिबंधित कर दिया है।

प्रदेश की राजनीति में रखते थे दखल
आपको बता दें कि हरिओम, यादव मुलायम सिंह यादव के समधी भी हैं। इस लिहाज से वह प्रदेश की राजनीति में दखल रखते थे। राजनीति में उनका अच्छा खासा दबदबा था। कोर्ट के चंगुल में आने के बाद उन पर शिकंजा कसता ही चला गया। अब उनके द्वारा कराए गए कार्यो की भी जांच कराए जाने की मांग की जा रही है। विधायक और उनके पुत्र पर कई संगीन धाराओं में मुकदमे दर्ज हैं।