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यहां मिलते हैं ठग्गू के लड्डू तो बदनाम है कुल्फी

कंपू वाले बड़े दिलवाले, अतिथि की खातिरदारी में नंबर वन हैं। बाहरी शहरों से लोग जब अपने रिश्तेदारों के किसी समारोह में आते हैं 

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Ruchi Sharma

Feb 20, 2016

कानपुर.कंपू वाले बड़े दिलवाले, अतिथि की खातिरदारी में नंबर वन हैं। बाहरी शहरों से लोग जब अपने रिश्तेदारों के किसी समारोह में आते हैं तो वह सबसे पहले कानपुर के लजीज व्यंजन का स्वाद चखने के लिए निकल पड़ते हैं। शहर में घूमने के लिए भले ही ज्यादा जगह न हो, लेकिन खाने के मामले में एक से बढ़कर एक लजीज व्यंजन मौजूद हैं। 54 साल की चाहे बनारसी चाय हो या चटपटी चाट फिर खस्ता कचौडी, यार ठग्गू के लड्डू की मिठास लाजवाब। सभी डिसेज इतने टेस्टी हैं कि लोग चटखारे लगाकर इनका स्वाद लेते हैं |

साहू की कचौड़ी का अपना अलग ही स्वाद

आर्य नगर में करीब 30, साल पहले एक ठेले में कचौड़ी बनती थी, लोग सुबह नाश्ते के लिए राजू के ठेले के पास लाइन पर खड़े हो जाते है। इतने साल बीत जाने के बाद भी साहू की कचौड़ी ग्राहकों की आज भी सुबह की पहली पसंद बनी हुई है। रीजू साहू ने न कचौड़ी बनाने का तरीका बदला और न ही ठेला। यहां के लोगों का कहना है कि अगर सुबह का नाश्ता अगर साहू कचौड़ी वाले के यहां न होतो दिन अधूरा सा लगता है। आलू के स्पेशल मसाला भरी, कचौड़ी और छोले की चटपटी सब्जी और सलाद के साथ कचौड़ी का स्वाद ही कुछ और है। गर्मा-गर्म स्पेशल कचौडिय़ों की बात ही कुछ और है।

गोपाल के भरवां खस्ते का टेस्ट कुछ अलग

खस्ते तो कई तरह के होते हैं लेकिन नरौना चौराहे स्थित गोपाल के स्पेशल भरवां खस्तों की तो बात ही कुछ और है। मैदा के बने छोटे-छोटे खस्तों में चटपटे आलू भरकर उसमें छोटे-छोटे दही बड़े भरकर जब पुदीने, हरी मिर्च और खटाई की जायकेदार चटनी से भीगी हरी मिर्च के साथ खाते हैं तो मजा आ जाता है |

आम-ओ-खास, यहां की नमकीन लाजवाब

असलम खान निवासी नेहरु नगर और आंनद निगम जवाहर नगर के परिजनों का कहना है कि जब भी हमारे बेटे दुबई से आते हैं तो आदर्श की नमकीन ले जाना नहीं भूलते। असलम के पिता साजिद ने बताया कि हम 20 साल से यहीं से नमकीन खरीदते हैं, क्योंकि टेस्ट के साथ क्वालिटी आदर्श नमकीन की अलग ही है। बिरहाना रोड की आदर्श नमकीन तो पूरे प्रदेश में फेमस है। हर आम-ओ-खास यहां का स्पेशल ढोकला नाश्ते में खाए बिना रह नहीं पाता है। बिल्कुल स्पंजी ढोकला, राई और नमक के घोल से छुकी हुई मोटी हरी मिर्च के साथ ढोकले का स्वाद ही निराला लगता है। यहां मिलने वाली स्पेशल पंचम दालमोठ भी बेहद जायकेदार है।

बनारसी की चाय में है गजब कि मिठास

कानपुर आने वाले ने शख्स ने अगर बनारसी टी स्टॉल की स्पेशल चाय की चुस्कियां नहीं लीं तो फिर कुछ नहीं किया। जी हां, मोतीझील चौराहे पर 1953 में खुली बनारसी टी स्टॉल पर दिनभर में 7000 से ज्यादा स्पेशल चाय की बिक्री होती है। चाय में पका हुआ लाल दूध, स्पेशल चाय मसाला और दानेदार चाय की पत्ती का यूज होता है। ओनर अनिल गुप्ता का कहना है कि दादा जी की खोली दुकान आज उनके बेटे चला रहे हैं। जब उनसे पुरानी दुकान के राज के बारे में पूछा गया तो उनका कहना था कि पुरानी दुकान को सही करवाने के लिए दो-तीन महीने का टाइम चाहिए। ये टाइम नहीं मिल पा रहा है क्योंकि एक दिन भी दुकान बंद रहती है तो कस्टमर घर आकर चाय पिलाने को कहते हैं।

कचहरी के राजकुमार के छोले-भठूरे

चटपटे स्पेशल छोले-भठूरे खाने के लिए शहर वाले कचहरी रोड स्थित राजकुमार की दुकान पर ही लोग पहुंचते हैं। तेज मसालेदार छोले खाकर मजा आ जाता है। छोले-भठूरे के साथ स्पेशल चटपटा आचार और सूखे आलू जायके को और बढ़ाते हैं। कचहरी में राजकुमार के छोले का अगर लुफ्त उठाना है तो साहब आपको एक घंटे पहले टोकन लेना होगा, जब नंबर आएगा, तभी छोले - भटूरे का स्वाद चख पाएंगे।

बदनाम कुल्फी

40 साल से शहर के लोगों के जुबान पर राज करने वाली बदनाम बदनाम कुल्फी के टेस्ट का क्या कहना। खोया, मेवा और खोए से निर्मित ये स्पेशल कुल्फी बनाने में कई घंटे लगते हैं। इसको जमाने के लिए भी स्पेशल टेक्निक का यूज किया जाता है इस स्पेशल कुल्फी की बात निराली है।