
राजधानी में अनोखा विरोध प्रदर्शन (Photo source- Patrika)
CG News: इलाके में रोपाई का काम लगभग पूरा हो चुका है। अब चलाई का दौर चल रहा है। खेती का ये वो अहम दौर है, जब फसलों का उत्पादन बढ़ाने डीएपी की जरूरत पड़ती है। अब इसमें महज 10 दिन का समय बचा है, लेकिन सरकारी सोसाइटियों में डीएपी मिल ही नहीं रही। इससे किसान परेशान हैं। मजबूर होकर निजी कृषि केंद्रों से महंगे दामों पर डीएपी खरीद रहे हैं। अभनपुर-आरंग विधानसभा में निर्वाचन क्रमांक 11 से जिला पंचायत सदस्य यशवंत धनेंद्र साहू ने बुधवार को राजधानी में इसके खिलाफ अनोखा प्रदर्शन किया।
रायपुर के संतोषी नगर इलाके से उन्होंने साइकिल यात्रा निकाली। उन्होंने जो कुर्ता पहन रखा था, उस पर लिखा था… मैं परेशान हूं क्योंकि किसान हूं। साइकिल चलाते हुए वे जिला पंचायत कार्यालय पहुंचे। यहां सामान्य सभा की बैठक बुलाई गई थी। पंचायत सदस्यों के अलावा आरंग विधायक गुरु खुशवंत साहेब और धरसींवा विधायक अनुज शर्मा ने भी इसमें शिरकत की।
यशवंत ने डीएपी की किल्लत का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जो डीएपी 1300 रुपए में मिलना चाहिए, सोसाइटियों में स्टॉक न होने से किसानों को वह 2000-2100 रुपए प्रति बोरा की दर से खरीदना पड़ रहा है। सत्ता पक्ष के दोनों विधायकों ने उनकी बात काटते हुए कहा कि डीएपी का पर्याप्त स्टॉक है। हालांकि, सहकारिता विभाग के अधिकारी ने माना कि सरकारी स्टॉक में डीएपी की कमी है। इसे जल्द दूर करने की बात भी कही, लेकिन चलाई के अंतिम दौर में ऐसी लेटलतीफी को लेकर पंचायत सदस्यों ने जिम्मेदारों को घेरने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
जिला पंचायत की पिछली बैठक जून महीने में हुई थी। यशवंत ने तब भी खाद की कालाबाजारी और डीएपी की कमी का मुद्दा उठाया था। तब उन्हें भरोसा दिलाया गया कि जांच के लिए एक टीम बनाई जाएगी, जो अलग-अलग जगहों पर छापा मारकर कालाबाजारी रोकेगी। महीनेभर बाद भी टीम अस्तित्व में नहीं आ पाई है। इधर, खाद और डीएपी की आपूर्ति के लिए जो डीएमओ सबसे ज्यादा जिम्मेदार होते हैं, वे सामान्य सभा की 2 बार बैठकों से नदारद रहे हैं।
CG News: किसानों को प्रति एकड़ खेत में 2 बोरा डीएपी की जरूरत पड़ती है। जबकि, सरकारी सोसाइटियों में उन्हें एक बोरा डीएपी ही उपलब्ध करवाया जा रहा है। खेत में डीएपी न डालने का असर सीधे फसल की पैदावार पर पड़ती है। एक अनुमान के मुताबिक जिन खेतों में 20 से 22 क्विंटल धान की फसल होती है, तो इसमें 4 से 5 क्विंटल की गिरावट आ सकती है। यही वजह है कि 10 एकड़ जमीन वाले किसानों को 5 एकड़ की जरूरत महंगा डीएपी खरीदकर पूरी करनी पड़ रही है। अचानक इतनी डिमांड क्रिएट होने के बाद डीएपी की कालाबाजारी भी बढ़ी है।
Published on:
31 Jul 2025 11:59 am
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