
सरकार ने राजिम कुंभ को पुन्नी मेला के रूप में मनाये जाने की घोषणा, शुरू किया महानदी बचाओ अभियान
नवापारा-राजिम . छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राजिम कुंभ कल्प को राजिम पुन्नी माघी मेला के रूप में मनाये जाने की घोषणा कर दी गई है। 19 फरवरी से शुरू होने वाले मेले को देखकर महानदी के संरक्षण के प्रति जागरुक लोगों ने एक बार फिर महानदी बचाओ संरक्षण समिति ने अभियान प्रारंभ कर दिया गया है।
समिति की प्रति सप्ताह बैठकें हो रही है और छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 5 हजार पोस्टकार्ड में संदेश भेजकर महानदी संरक्षण की कोशिशें तेज कर दी गई हैं। समिति के सदस्यों का कहना है कि पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने तो उनकी आवाज को दबाते हुए महानदी की दुर्गति करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी, कम से कम कांग्रेस की वर्तमान सरकार उनकी गुहार सुने और राजिम व नवापारा शहरवासियों की जीवनदायिनी को अभयदान दे। राजिम निवासी पदमा दुबे सीधे तौर पर कहती हैं कि महानदी के अस्तित्व को भाजपा सरकार ने समाप्त किया है। राजिम कुंभ फिर राजिम कुंभ कल्प के नाम पर भाजपा सरकार ने 15 दिनों के लिए जो त्रिवेणी संगम महानदी में मुरुम की सडक़ें हर वर्ष बनाई हैं। उसी का दुष्परिणाम है कि महानदी आज विकृत हो चुकी है।
हमारे द्वारा लगातार मुरुम डाले जाने के विरोध हर वर्ष किया जाता रहा है। जिसमें अमितेष शुक्ल व धनेन्द्र साहू जैसे दिग्गज भी शामिल हुए। अब कांग्रेस सरकार आई है तो हम चाहते हैं कि हमारे साथ-साथ दोनों दिग्गज कांग्रेसी विधायक अपनी सरकार से आग्रह करे कि नदी में मुरुम न डाली जाए।
मुख्यमंत्री का कथन बैठक कर निर्णय लेंगे
सोमवार को राजिम माता जयंती समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने संवाददाताओं से कहा कि राजिम पुन्नी माघी मेला आयोजन के लिए हमारी सरकार ने निर्णय लिया है कि इसके संशोधन के लिए विधानसभा में बिल लाया जाएगा। यहां के जनप्रतिनिधियों व नागरिकों को आमंत्रित कर बैठक करते हुए उनसे मशविरा लिया जाएगा, उसके अनुसार ही राजिम माघी पुन्नी मेला का आयोजन किया जाएगा।
पहले नदी में पानी भरा रहता था
नवापारा निवासी मो. अमजद रजा ने बताया कि पहले लगभग साल भर नदी में पानी मौजूद रहता था, लेकिन आज स्थिति यह है कि गर्मी में लोग पानी की बंूद के लिए तरसते हैं। अभी ठंड है और इस मौसम में भी नदी में पानी नहीं है। इसे भविष्य की चेतावनी के तौर पर लेना चाहिए। भाजपा सरकार को जो करना था, उसने किया । लेकिन अब
कांग्रेस की सरकार ऐसा न करे।
त्रिवेणी संगम अस्तित्व खतरे में
महानदी का अस्तित्व खतरे में दिखाई दे रहा है, क्योंकि यहां हर साल मेले के नाम पर मुरुम की सडक़ बना दी जाती है। उसके बाद उसे हटाने की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। हम यहां के पुराने नागरिक निवासी हैं और नदी के पुराने स्वरूप को देखते आए हैं, लेकिन वर्तमान में महानदी का जो स्वरूप हो गया है, उससे आत्मा दुखी होती है।
हमने खुद विरोध किया था : अमितेष
दूसरी ओर राजिम विधायक अमितेष शुक्ल ने कहा कि वे खुद महानदी में मुरुम डालने के प्रबल विरोधी थे। हमने यहां की जनता के साथ खुद इसका विरोध किया था। लेकिन पूर्ववर्ती सरकार अपनी करनी पर उतारू थी। अब हमारी सरकार है और महानदी की हत्या जैसा जघन्य कदम की अपेक्षा हमारी सरकार से नहीं की जा सकती । हम महानदी को पूर्वरूप में लाने की दिशा में प्रयास करेंगे।
Published on:
09 Jan 2019 05:22 pm
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