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नदी पर पुल नहीं, बारिश में रोज जान जोखिम में डालकर आना-जाना करते हैं ग्रामीण

बारिश ने सरकार की अनदेखी और छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों की दयनीय स्थिति की पोल खोल कर रख दी है।

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नदी पर पुल नहीं, बारिश में रोज जान जोखिम में डालकर आना-जाना करते हैं ग्रामीण

नदी पर पुल नहीं, बारिश में रोज जान जोखिम में डालकर आना-जाना करते हैं ग्रामीण

मैनपुर. बारिश ने सरकार की अनदेखी और छत्तीसगढ़ के ग्रामीणों की दयनीय स्थिति की पोल खोल कर रख दी है। जहां बारिश के दौरान लोगों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदियों को पार करना पड़ रहा है। इसके बावजूद सरकार के द्वारा इस मामले में कोई भी एक्शन नहीं लिया जा रहा है।

बीहड जंगल के भीतर बसे गांव अमाड, देवझरअमली में पहुंचने के लिए उदंती नदी के साथ कई छोटे-बड़े नालों को पार करना पड़ता है। बारिश में इन दिनों यहां घुटना तक पानी बह रहा है। इन ग्रामों में स्वास्थ्य सुविधा बेहद लचर है। संजीवनी और महतारी एक्सप्रेस एम्बुलेंस भी नहीं पहुंच पाती। मरीजों को कंधे पर बिठाकर नदी पार कर लाना ले जाना पड़ता है। टाइगर रिजर्व के भीतर बसे होने के कारण इन ग्रामों में पक्की सडक़ और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। ग्रामीणों द्वारा कई बार मांग करने के बावजूद शासन-प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है।

जब भी कोई विकास और निर्माण कार्य की बात आती है तो वन विभाग द्वारा अभयारण क्षेत्र का हवाला देकर निर्माण कार्यों पर रोक लगा दिया जाता है। ग्रामीणों का कहना है सांसद और विधायक के गांवों में आने के बाद ही यहां की स्थिति सुधर पाएगी। ग्राम पंचायत अमाड़ की जनसंख्या 1200 के आसपास है।

स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव में यहां के ग्रामीण झाड़-फूंक कराने को मजबूर हैं। सरपंच सोहद्रा बाई नेताम, उपसरपंच मदनलाल यादव, गोपाल सिंह, बालाराम, गोमती बाई, पुष्पाबाई, जंगलमारू, मिथलूबाई, प्रेमिन बाई, दशोदा बाई, घेमबाई, सज्जन सिंह, बलीराम व ग्रामीणों ने बताया कि कई बार सांसद और विधायक को अमाड़ ग्राम में आने का निमंत्रण देकर थक चुके हैं।