2 नवंबर 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

हैंडपंपों से आ रहा मटमैला- लाल पानी, पीने से गांव वाले हो रहे बीमार फिर भी नही हो रही स्वच्छता

धोबनमाल पंचायत के आश्रित ग्राम डोंगरीभाठा के ग्रामीण इन दिनों मिट्टी युक्त पानी पीने को मजबूर हैं
2 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

गरियाबंद

•

image

Deepak Sahu

•

Updated: 29 Jul 2018, 5:41 PM IST

water pollution

हैंडपम्पों से आ रहा मटमैला- लाल पानी, पीने से गांववाले हो रहे बीमार फिर भी नही हो रही स्वच्छता

देवभोग. ओडिशा सीमा से लगा हुआ धोबनमाल पंचायत के आश्रित ग्राम डोंगरीभाठा के ग्रामीण इन दिनों मिट्टी युक्त पानी पीने को मजबूर हैं। मुहल्ले में पिछले तीन महीने से तीनों हैंडपंप में मटमैला और लाल पानी आ रहा है। वहीं गांव में पानी के स्रोत की व्यवस्था नहीं होने के कारण ग्रामीण मजबूरीवश हैंडपंप के पानी को कपड़े में छानकर पीने को मजबूर हो गए हैं।

गांव के गोवर्धन मरकाम ने बताया कि हैंडपंप के पानी में काला चूर्ण बहुत अधिक मात्रा में आ रहा है। वहीं बर्तन में पानी भरे जाने के कुछ ही देर में पानी का रंग लाल पड़ रहा है। वहीं ग्रामीण पिछले तीन महीने से मटमैला युक्त पानी पी रहे हैं। जिसके चलते आए दिन ग्रामीणों का स्वास्थ्य भी बिगड़ रहा है। ग्रामीणों की माने तो गांव में उल्टी और दस्त की शिकायत भी आए दिन हो रही है।

गौरतलब है कि गांव में पीने के पानी का हैंडपंप ही एकमांत्र साधन है। मुख्यालय से इसकी दूरी अधिक होने के कारण पीएचई विभाग के जिम्मेदार इस गांव का दौरा करना ही भूल गए हैं। गांव के गोवर्धन मरकाम की माने तो पिछले छह महीने से एक भी कर्मचारी हैंडपंप की जांच करने गांव में नहीं पहुंचा है। सरपंच और सचिव के माध्यम से समय-समय में जानकारी पीएचई विभाग को देते आ रहे हैं। इसके बाद भी विभाग ने हमेशा उदासीनता बरती है। गोवर्धन मरकाम और गोपाल ओटी ने बताया कि पिछले तीन महीने से मटमैला और गंदा पानी पीने से ग्रामीणों के स्वास्थ्य पर इसका प्रतिकूल असर देखा जाने लगा है। पिछले छह महीने से पीएचई का एक भी कर्मचारी गांव के दौरे में नहीं पहुंचा है। कर्मचारी गांव का दौरा करना ही भूल गए हैं। ऐसे में डोंगरीभाठा गांव के ग्रामीणों ने निर्णय लिया है कि हैंडपंप से पानी भरकर मैनपुर मुख्यालय पहुंचकर पीएचई के कर्मचारी को भेंट करेंगे। इसके बाद उनसे जवाब मांगेंगे।

गांव के गोवर्धन और गोपाल का कहना है कि मैनपुर में पीएचई विभाग के अधिकारी को पानी भेंट किए जाने के बाद फिर ग्रामीण जिला मुख्यालय जाकर कलक्टर श्याम धावड़े से मिलकर उन्हें पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराया जाएगा। बताएंगे कि किस तरह पिछले तीन महीने से मटमैला और गंदा पानी पीना उनकी मजबूरी बन गई है। गोवर्धन ने बताया कि सरकार दावा करती है, कि हर अंतिम गांव तक स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करना उनका प्रमुख कर्तव्य है। वहीं सरकार के दावों के विपरीत अधिकारी वर्ग काम करते हुए ग्रामीणों को मटमैला पानी पीने मजबूर कियाजा रहा है।

गरियाबंद के कार्यपालन अभियंता फिलिप एक्का ने कहा कि आपके माध्यम से मामले की जानकारी मिली है। मैं तुरंत संबंधित एसडीओ को निर्देंशित करूंगा, कि वहां कैसी स्थिति इसके विषय में जानकारी लेकर उचित कदम उठाया जाए।