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268 वोट से हार और 10 हजार वोट का खेल, बोधगया विधानसभा चुनाव में NDA की हार पर फिर क्यों छिड़ी बहस?

Bodh Gaya Election Controversy हम (सेक्युलर) में नंदलाल मांझी की वापसी के बाद बोधगया सीट पर NDA की हार फिर चर्चा में है। 2025 चुनाव में NDA प्रत्याशी श्यामदेव पासवान 268 वोटों से हार गए थे, जबकि बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने वाले नंदलाल मांझी को करीब 10 हजार वोट मिले थे।

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गया

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Rajesh Kumar Ojha

May 19, 2026

Bodh Gaya Election Controversy

जीतन राम मांझी के साथ नंद लाल मांझी

Bodh Gaya Election Controversy केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी की पार्टी हम (सेक्युलर) में नंदलाल मांझी की वापसी के साथ ही बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बोधगया सीट पर एनडीए प्रत्याशी श्यामदेव पासवान की हार को लेकर फिर चर्चा तेज हो गई है। एनडीए के सीट बंटवारे में बोधगया सीट चिराग पासवान की पार्टी लोजपा (रामविलास) के खाते में गई थी। पार्टी ने यहां से श्यामदेव पासवान को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, कांटे की टक्कर में आरजेडी प्रत्याशी कुमार सर्वजीत ने उन्हें करीब 268 वोटों से हराकर सीट अपने नाम कर ली। वहीं, हम (सेक्युलर) के वरिष्ठ नेता नंदलाल मांझी टिकट नहीं मिलने से नाराज होकर बागी हो गए थे और निर्दलीय चुनाव मैदान में उतर गए थे। चुनाव में उन्हें करीब 10 हजार वोट मिले थे।

बगावत के पीछे सियासी नाराजगी

नंदलाल मांझी के बागी होने के बाद हम (सेक्युलर) ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि, चुनाव के करीब छह माह बाद जीतन राम मांझी ने उन्हें दोबारा पार्टी में शामिल करा लिया। कहा जा रहा है कि एनडीए के सीट बंटवारे में जीतन राम मांझी बोधगया सीट चाहते थे, लेकिन यह सीट लोजपा (रामविलास) के खाते में चली गई, जिससे वे नाराज बताए जा रहे थे। चर्चा यह भी है कि मांझी इस सीट से अपनी बेटी को चुनाव लड़ाना चाहते थे। सूत्रों के अनुसार, इसी वजह से हम पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं के इशारे पर नंदलाल मांझी चुनाव मैदान में उतरे थे। हालांकि, नंदलाल मांझी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वे किसी के कहने पर चुनाव नहीं लड़े थे। उनका कहना है कि उन्होंने विधानसभा चुनाव “जिसकी जितनी हिस्सेदारी, उसकी उतनी भागीदारी” के मुद्दे को लेकर लड़ा था।

भीतरघात पर बढ़ी सियासी बहस

नंदलाल मांझी का कहना है कि बोधगया विधानसभा सीट पर सबसे अधिक यादव मतदाता हैं। इसके बाद मांझी, मुस्लिम और फिर पासवान समुदाय के वोटर आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एनडीए ने जातीय समीकरण को समझे बिना श्यामदेव पासवान को उम्मीदवार बना दिया, जिससे नाराज होकर उन्होंने निर्दलीय चुनाव लड़ने का फैसला किया। वहीं, लोजपा (रामविलास) के एक नेता का कहना है कि बोधगया सीट पर चुनाव भले ही एनडीए प्रत्याशी ने लड़ा, लेकिन उन्हें जीतन राम मांझी का कोई सहयोग नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि मांझी के समर्थक शुरू से ही उनके प्रत्याशी के खिलाफ काम कर रहे थे।

बागी बने मांझी के करीबी

नंदलाल मांझी हम पार्टी के गया जिला प्रवक्ता थे। जीतन राम मांझी के सांसद बनने के बाद उन्हें सांसद प्रतिनिधि बनाया गया था। हालांकि, विधानसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव लड़ा, जिसके बाद पार्टी ने उन्हें कुछ समय के लिए निष्कासित कर दिया था। अब करीब छह माह बाद उनकी फिर से पार्टी में वापसी हो गई है और वे दोबारा सांसद प्रतिनिधि बन गए हैं।