
विश्व शांति महोत्सव में टोडी गईं कुर्सियां (फोटो-इडो ग्रैब)
मोक्ष और ज्ञान की भूमि बिहार के गया जी में पीस एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित तीन-दिवसीय विश्व शांति महोत्सव के पहले ही दिन अशांति और अफरा-तफरी का माहौल देखने को मिला। गांधी मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम में मशहूर शिक्षक खान सर के नहीं पहुंचने पर छात्रों ने हंगामा मचा दिया। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और विभिन्न धर्मगुरुओं की मौजूदगी में नाराज छात्रों ने कुर्सियां तोड़ना शुरू कर दिया। देखते ही देखते पूरे मैदान में भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई। जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं।
इस कार्यक्रम का उद्घाटन शनिवार को केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने दीप प्रज्वलित कर किया। मंच पर, हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध और जैन धर्मों के बड़े स्कॉलर्स शांति और सद्भाव पर चर्चा करने के लिए पहुंचे थे। इस कार्यक्रम में खान सर को भी शामिल होना था और उन्हें सुनने के लिए बड़ी संख्या में युवा कार्यक्रम स्थल पर जमा हुए थे।
लेकिन जैसे ही यह खबर फैली कि खान सर कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे, भीड़ ने हंगामा करना शुरू कर दिया। छात्र जल्द ही बेकाबू हो गए और आयोजकों के खिलाफ नारे लगाते हुए कुर्सियां फेंकने लगे। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि कार्यक्रम को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। स्थिति को काबू में लाने की कोशिशों में आयोजकों को काफी मशक्कत करनी पड़ी।
हंगामे के बीच कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने देश की शिक्षा व्यवस्था की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा, 'आजकल की शिक्षा अब केवल पेशेवर और किताबी बनकर रह गई है। लोग उच्च शिक्षा केवल अपने निजी फायदे और आर्थिक लाभ के लिए हासिल कर रहे हैं। यह एक ऐसा चलन है जिसके कारण समाज से नैतिकता गायब होती जा रही है। यही कारण है कि आज का युवा इतना उग्र हो रहा है। जब तक पाठ्यक्रम में नैतिक शिक्षा शामिल नहीं होगी, तब तक विश्व में सच्ची शांति कायम नहीं हो सकती।'
मांझी ने आगे कहा कि भूख और अशांति के बीच गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि जब तक लोग भूखे रहेंगे, तब तक शांति स्थापित नहीं हो सकती। अपने संबोधन में, मांझी ने गया जिले के विकास से संबंधित कई घोषणाएं भी कीं। उन्होंने कहा कि फल्गु नदी में साल भर पानी रहे, इसके लिए सोन नदी से पानी मोड़ने की योजना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। इसके अलावा बीथो से बोधगया के बीच बैराज निर्माण और नदी के दोनों किनारों पर सड़क निर्माण की योजना पर भी जोर दिया गया।
जब छात्र शांत नहीं हुए, तो एक धार्मिक उपदेशक मंच पर आए और उन्होंने कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि भले ही खान सर युवाओं के लिए एक आदर्श हों, लेकिन इस तरह का हिंसक व्यवहार उनकी शिक्षाओं और आदर्शों के बिल्कुल विपरीत है। युवाओं से संयम बरतने की अपील करते हुए, उन्होंने उन्हें याद दिलाया कि भारत हमेशा से बुद्ध और शांति की धरती रहा है, न कि युद्ध और हिंसा की।
भले ही पहले दिन छात्रों ने हंगामा किया, लेकिन सम्मेलन में शामिल विभिन्न धर्मों के धर्मगुरुओं ने भी एकता और शांति का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि इतिहास इस बात का गवाह है कि हर युग में, युद्ध का परिणाम हमेशा अधर्म की हार ही रहा है। स्वामी सुशील गोस्वामी महाराज ने कहा कि आज के दौर में युद्ध नहीं, बुद्ध की जरूरत है। सूरज सिंह नलवा ने टिप्पणी की कि युद्ध का परिणाम केवल अन्याय की हार होता है, मानवता की नहीं। इस्लामिक स्कॉलरब्रदर यूसुफ ने कहा कि इस्लाम ने हमेशा शांति और सद्भाव का संदेश फैलाया है।
Published on:
12 Apr 2026 02:07 pm
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