बोधगया। मन की शुद्धता के लिए वाणी पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है। भगवान बुद्ध का कहना है कि सभी कर्मों में मन ही प्रधान है। बुद्ध ने सिद्धांतों के आधार पर मानवता की सेवा पर बल दिया है। ये बातें तिब्बती बौद्ध धर्मगुरू 17वें करमापा उज्ञेन त्रिनले दोरजे ने अपने नेतृत्व में शुरू हुई 33वीं अंतरराष्ट्रीय काग्यू मोनलम चेन्मो पूजा में कहीं।
विश्व शांति के उद्घोष के साथ शुरू हुई इस पूजा में 30 देशों के बौद्धों ने विशेष मंत्रों का जाप किया। इस अवसर पर करमापा ने अपने श्रद्धालुओं को मन और वाणी पर नियंत्रित करने को कहा। उन्होंने कहा कि हमें मन को वश में करना होगा। मन की दिशा परिवर्तित कर उसपर विजय पाना होगा और सदविचार की ओर लाना होगा।
उन्होंने कहा कि जब भी सोचो अच्छा सोचो, अपनी और दूसरों की भलाई की बात सोचो। मन को दुष्ट विचारों की ओर मत जाने दो। कहा कि सच्चे अर्थ में धर्म का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से हम भी दुख की पीड़ा से मुक्त हो निर्वाण का लाभ उठा सकते हैं।
हमें अपने की परिधि से ऊपर उठकर दूसरों के बारे में सोचना होगा। इससे महाकरूणा की उत्पत्ति होगी और हम बोधिसत्व की श्रेणी में पहुंच सकते हैं। बोधगया के सुजाता बाईपास पर स्थित तेरगर बौद्धमठ के पवेलियन में विश्व शांति के लिए काग्यू मोनलम पूजा हो रही है। यह पूजा २२ फरवरी तक चलेगी।