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रंग लाई माउंटेन मैन की मेहनत, रेलमंत्री सुरेश प्रभु करेंगे गहलोर गांव में दशरथ मांझी स्टेशन का निर्माण

अक्षर संसार फाउंडेशन के कार्यक्रम रेल मंत्री ने कहा कि बिहार के लोगों के साथ उनकी भावनाएं जुड़ी हुई हैं।

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Indresh Gupta

Sep 02, 2016

dashrath manjhi

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गया। गहलोर गांव की पहचान बन चुके दशरथ मांझी की मेहनत ने अब रंग पकड़ लिया है। पहाड़ काटकर सड़क बनाने वाले मांझी के गांव तक अब रेल लाइन बिछाए जाने का फैसला कर लिया गया है। रेल मंत्री सुरेश प्रभु 'माउंटेन मैन' के गांव तक रेल का विस्तार करना चाहते हैं।

बता दें कि गहलौर घाटी में बनने वाले स्टेशन का नाम दशरथ मांझी के नाम पर होगा। साल 2015 में आई फिल्म मांझी: द माउंटेन मैन आई थी। जिसमें दशरथ मांझी के जीवन संघर्ष को दिखाया गया था। पत्नी की मौत के बाद वह फैसला लेते हैं कि गहलोर गांव के पहाड़ को काटकर सड़क बनाएंगे। अपने अथक प्रयास और वृद्धावस्था तक के संघर्ष से वह इस काम को करने में सफल भी हो जाते हैं। आज उनकी यही मेहनत और सफल हो गई है। बुधवार को नई दिल्ली के कंस्टीट्यूशन क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में रेल मंत्री ने कहा कि वह मांझी के गांव तक रेल लाइन बिछाने के लिए अधिकारियों से बात करेंगे।

अक्षर संसार फाउंडेशन के कार्यक्रम रेल मंत्री ने कहा कि बिहार के लोगों के साथ उनकी भावनाएं जुड़ी हुई हैं। उन्होंने कहा कि जल्द ही रेलवे लाइन के लिए सर्वे किया जाएगा। दशरथ मांझी ने गहलौर घाटी में 1960 से लेकर 1982 तक पहाड़ को छेनी और हथौड़ी से काटते रहे. 22 साल में पहाड़ को काटकर दशरथ ने 25 फीट ऊंची, 30 फीट चौड़ी और 360 मीटर लंबी सड़क बना डाली थी।

जानकारी के अनुसार, सड़क बनने से पहले गहलौर घाटी से वजीरगंज जाने के लिए 68 किमी घूमकर जाना पड़ता था, अब सड़क बन जाने से यह दूरी मात्र 6-7 से किमी हो गई है। बता दें कि 17 अगस्त 2007 को दिल्ली एम्स में कैंसर से पीड़ित दशरथ मांझी की मौत हो गई थी। जिसके बाद 2015 में फिल्म निर्देशक केतन मेहता ने ‘मांझी द माउंटेन मैन’ के नाम से दशरथ मांझी के जीवन पर फिल्म बनाई थी। इस फिल्म की शूटिंग 85 फीसदी गहलौर घाटी में हुई थी।

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