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लॉकडाउन के बीच जानवरों के लिए मसीहा बनीं एक महिला, हर दिन 80 कुत्तों को खिलाती है खाना

पति-पत्नी मिलकर अपने इलाके के आवारा कुत्तों की कर रही हैं सेवा

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गाजियाबाद. देशभर लॉकडाउन घोषित होने के बाद से अधिकतर दफ्तर, दुकानें, होटल, फैक्टरियां बन्द हैं। लोग अपने घरों के अंदर रह रहे हैं । ऐसे में सड़क पर रहने वाले पशु पक्षियों की जान भी आफत में है। उनको भी खाना पानी नहीं मुहैया हो पा रहा है। ऐसे में गाजियाबाद में कुछ लोग सड़क पर रहने वाले कुत्तों के लिए खाने-पीने की व्यवस्था करने में जुटे हैं। अब जरूरत है कि सरकारी स्तर से ऐसा कोई ठोस और बड़ा प्रयास हो, जिससे इन जानवरों को लॉकडाउन की परिस्थितियों में खाना मिल सके।

ये बेजुबान जानवर अपने मुंह से खुद खाना नही मांग सकते हैं। ये अपने खाने के लिए अपने घरों से बाहर निकले लोगों पर निर्भर थे, जो इनसे प्रेमभाव रखते थे और इनको खाना मुहैया करवा देते थे या फिर ये होटलों और रेहड़ी-पटरियों पर लगने वाले खाने की दुकानों से जूठे पत्तल चाटकर अपना पेट भर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते अधिकतम लोग अपने घरों में कैद है और अपने दफ्तरों, फैक्टरियों और दुकानों तक पर नही जा रहे हैं। जब ये सभी लोग काम पर या घरों से बाहर जाते थे, तो एक लगाव की वजह से इन कुत्तो को रोटी, बिस्किट या कुछ खाना दे दिया करते थे। गाजियाबाद में हजारों की संख्या में गैर पालतू कुत्ते हैं, जो सड़कों पर रहते हैं। लॉडाउन की मार इन पर भी पड़ी है। अब ये कुत्ते भूखे मरने को मजबूर हैं, क्योंकि लोग अब अपने घरों में ही कैद हैं।

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लिहाजा, ऐसे में अब भी कुछ लोग निजी प्रयासों से इन्हें खाना मुहैया करा रहै हैं । गाजियाबाद के क्रॉसिंग इलाके में रहने वाली गुरप्रीत और उनके पति भूपिंदर ढिल्लन अपने इलाके के 70-80 कुत्तों को रोजाना भोजन उपलब्ध करा रहे हैं । दोनों पति-पत्नी इलाके में सुबह और रात में इन भूखे कुत्तों को खाना देने के लिए निकल पड़ते हैं। लॉकडाउन के बाद से उनका यह क्रम लगातार चल रहा है। कुत्तों को खाना खिलाने वाली महिला गुरप्रीत ने बताया कि सभी दुकाने, बाजार, होटल आदि बन्द हैं। ऐसे में कुत्ते भूखे रह रहे हैं। इसलिए वो अपने इलाके के 70- 80 कुत्तों को लॉकडाउन के दौरान खाना खिला रही हैं। गुरप्रीत का कहना है कि उन्हें ऐसा करने में बहुत आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

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एक सराहनीय प्रयास ये कर रहे हैं, लेकिन उनका यह प्रयास निजी स्तर पर है, लेकिन अब भी इन आवरा जानवरों की एक बड़ी संख्या है, जो भूखे प्यासे रहने को मजबूर हैं। अकेले गाजियाबाद में ही ऐसे पशुओं और पक्षियों की संख्या हजारो में हैं। ऐसे में सभी जगह अगर लोग अपने आस पास मौजूद जानवरों के खाने की थोड़ी-थोड़ी व्यवस्था भी कर पाये तो यह आवारा पशुओं के लिए जरूर कुछ मददगार साबित होगा। वहीं, जरूरत है कि सरकारी स्तर पर भी ऐसे बड़े प्रयास किये जाएं ।