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संजय निषाद को पुलिस ने रोका, नोकझोंक … मेरठ में जलाकर मारे गए युवक के परिवार से मिलने जा रहे थे

Sanjay Nishad stopped by police : मंत्री संजय निषाद को गाजियाबाद पुलिस ने मेरठ जाने से रोक दिया। मंत्री संजय निषाद मेरठ के सरधना क्षेत्र में सोनू कश्यप के परिजनों से मिलने जा रहे थे।
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गाज़ियाबाद

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Avaneesh Kumar Mishra

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Updated: 14 Jan 2026, 9:42 PM IST

मंत्री संजय निषाद, PC- X

गाजियाबाद : गाजियाबाद के यूपी गेट पर उस वक्त तनाव की स्थिति बन गई, जब कैबिनेट मंत्री संजय निषाद को पुलिस ने मेरठ जाने से रोक दिया। पुलिस ने उनके काफिले की गाड़ियों को आगे नहीं बढ़ने दिया। इस दौरान मंत्री की कौशांबी SHO अजय शर्मा और इंदिरापुरम एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव से तीखी नोकझोंक भी हुई।

एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने मंत्री से कहा कि उच्च अधिकारियों के आदेश हैं, इसलिए उन्हें मेरठ जाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पुलिस ने मंत्री के काफिले को करीब 30 मिनट तक यूपी गेट पर रोके रखा। संजय निषाद के काफिले में कुल तीन गाड़ियां शामिल थीं।

सोनू कश्यप के परिवार से मिलने जा रहे थे मंत्री

मंत्री संजय निषाद मेरठ के सरधना क्षेत्र में सोनू कश्यप के परिजनों से मिलने जा रहे थे। सोनू कश्यप की 8 जनवरी को अधजली लाश मिली थी। पुलिस के मुताबिक, युवक की पहले ईंट से हत्या की गई और फिर सबूत मिटाने के लिए शव पर मोबिल डालकर आग लगा दी गई। वहीं, स्थानीय लोगों का आरोप है कि सोनू कश्यप को जिंदा जलाकर मारा गया।

यूपी गेट पर रोके जाने से पहले संजय निषाद ने कहा था, 'हम सोनू कश्यप को इंसाफ दिलाने के लिए मेरठ जा रहे हैं। उसकी मां और परिवार से मिलेंगे, उन्हें समर्थन देंगे और स्थानीय अधिकारियों से बात करेंगे। इस मामले को लेकर मैं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मुलाकात करूंगा।'

पुलिस बोली- मंत्री लौटने पर सहमत

एसीपी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि स्थिति पर बातचीत के बाद मंत्री संजय निषाद वापस जाने पर सहमत हो गए हैं। हालांकि वे कुछ देर तक मौके पर ही रुके रहे। उनके काफिले की कुछ गाड़ियां भी वहीं मौजूद रहीं। मौके पर मेरठ के एसपी ट्रैफिक राघवेंद्र मिश्रा भी पहुंचे। सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद मंत्री को दिल्ली रवाना किया जाएगा।

गौरतलब है कि तीन दिन पहले गाजियाबाद पुलिस ने नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद को भी मेरठ जाने से रोकने की कोशिश की थी। हालांकि वह करीब 60 किलोमीटर का चक्कर लगाकर मेरठ सीमा में काशी टोल तक पहुंच गए थे।

जातीय तनाव से जुड़ा है पूरा मामला

सोनू कश्यप की हत्या का मामला सरधना के ज्वालागढ़ गांव से जुड़ा है, जो ठाकुर चौबीसी के कपसाड़ गांव से सटा हुआ है। कपसाड़ वही गांव है, जहां 8 जनवरी को एक ठाकुर बिरादरी के युवक ने दलित महिला सरिता की हत्या कर दी थी और उसकी बेटी रूबी का अपहरण कर लिया गया था।

उस घटना के बाद गांव में हालात इतने बिगड़े कि अघोषित कर्फ्यू जैसे हालात बन गए थे। पुलिस ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया था। 60 घंटे बाद आरोपी की गिरफ्तारी और रूबी की सकुशल बरामदगी हुई थी।

अब ठीक बगल के गांव में ठाकुर बनाम OBC का मामला सामने आने के बाद एक बार फिर जातीय राजनीति तेज हो गई है। इस केस में भी आरोपी ठाकुर बिरादरी से है, जबकि मृतक OBC वर्ग से बताया जा रहा है।

मेरठ से लखनऊ तक प्रदर्शन, सियासत तेज

इस मामले को लेकर 12 और 13 जनवरी को मुजफ्फरनगर, मेरठ से लेकर लखनऊ तक प्रदर्शन हुए। 12 जनवरी को सरधना से सपा विधायक अतुल प्रधान ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, बसपा सुप्रीमो मायावती और सांसद चंद्रशेखर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर नाराजगी जाहिर की।

कांग्रेस ने भी मामले पर प्रतिक्रिया दी। चंद्रशेखर ने दोबारा पोस्ट कर कहा कि वह जल्द पीड़ित परिवार से मिलने जाएंगे। 13 जनवरी को जब कुछ सपा नेता ज्वालागढ़ में पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे, तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान काफी हंगामा भी हुआ।

अब सवाल सियासत का

सोनू कश्यप हत्याकांड अब सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि राजनीतिक और जातीय टकराव का रूप ले चुका है। एक तरफ न्याय की मांग है, तो दूसरी तरफ नेताओं की एंट्री और पुलिस की रोक-टोक ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है। अब सबकी नजर प्रशासन की कार्रवाई और आगे की राजनीतिक हलचलों पर टिकी है।

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