
गाजियाबाद। जनपद में एक बेटे ने अपनी नेत्रहीन मां और मासूम बेटी को बेसहारा छोड़ दिया। अब दोनों अपनों के होते हुए भी दूसरों की मदद के भरोसे जिंदगी गुजार रही हैं। गाजियाबाद (Ghaziabad) के गांव बम्हेटा के रहने वाले एक शख्स ने उनको रहने के लिए एक कमरा दिया हुआ है जबकि कुछ स्थानीय लोग उनके राशन का इंतजाम करते हैं।
बचपन से नेत्रहीन है महिला
जानकारी अनुसार, करीब 60 वर्षीय संतोष देवी पत्नी चंद्रभान नेत्रहीन हैं। वह घंटाघर नगर कोतवाली क्षेत्री के पंचवटी कॉलोनी में रहती हैं। उनके साथ उनकी मासूम पोती भी है। मासूम के माता-पिता उसे छोड़ कर चले गए हैं। बुजुर्ग महिला ने बताया कि वह कक्षा 10 तक पढ़ी हुई हैं। उनके पति का देहांत काफी समय पहले हो चुका है। उनके दो बेटे और दो बेटियां हैं। सबकी शादी हो चुकी है। एक बहू उन्हें यहां छोड़कर चली गई थी। बेटी का पिता भी घर छोड़कर जा चुका है। उसका अभी तक कोई अता-पता नहीं है।
ससुराल में रह रहा एक बेटा
उनका दूसरा बेटा पत्नी के साथ अपनी ससुराल में ही रहने लगा है। दोनों की दयनीय हालत देखकर बम्हेटा के रहने वाले अशोक यादव ने उन्हें अपने प्लॉट में एक कमरा दे दिया। महिला की इच्छा पोती को स्कूल में दाखिला कराने की है लेकिन उसके पास इतने पैसे नहीं हैं। इसकी जानकारी जब अशोक निवासी राकेश मार्ग और विपुल अग्रवाल व सुमित निवासी पंचवटी को लगी तो तीनों उनसे मिलने पहुंचे। तीनों युवकों ने दिवाली पर नेत्रहीन बुजुर्ग और उस मासूम को माह भर का राशन दिया। इसके अलावा उन्होंने उनको माह भर का खर्च और बच्ची को कपड़े भी दिए।
Updated on:
28 Oct 2019 04:15 pm
Published on:
28 Oct 2019 04:12 pm
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