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योगी राज में शहीदों की मूर्ति के रखरखाव के नाम पर हो रहा गोलमाल

गाजियाबाद में शहीद के नाम पर ही निगम में गोलमाल किया जा रहा है।
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गाज़ियाबाद

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Rahul Chauhan

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Updated: 6 Mar 2018, 4:07 PM IST

yogi

गाजियाबाद। देश को आजादी दिलाने के लिए भगत सिंह, सुखदेव, राजगुरू और चंद्रशेखर आजाद के बलिदान को याद किया जाता है। लेकिन महानगर गाजियाबाद में शहीद के नाम पर ही निगम में गोलमाल किया जा रहा है। आईजीआरएस (मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल) पर की गई एक शिकायत के जबाव में निगम की तरफ से बताया गया कि शहीद चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा की रंगाई पुताई के लिए चालीस हजार रूपये का खर्चा आएगा। उच्च अधिकारियों से फंड की स्वकृति के बाद इसे ठीक कराया जाएगा। शिकायतकर्ता को फोन करके निगम की तरफ से अवगत कराया गया कि शहीदों की मूर्ति के रख-रखाव की जिम्मेदारी बीओटी पर प्राईवेट कंपनी को दी हुई है। जबकि बीओटी कंपनी मूर्ति के रख-रखाव का खर्चा पोल पर एड आदि से वसूलती है।

क्या है पूरा मामला

आरटीआई एक्टिविस्ट और समाजसेवी सचिन सोनी की तरफ से जनसुनवाई पोर्टल पर शहीद चन्द्रशेखर की मूर्ति को लेकर शिकायत की गई थी। शिकायत में बताया गया था कि मूर्ति टूटी हुई है इसलिए इसे जल्द से जल्द सही करवाया जाए। इसके जबाव में अवर अभिंयता श्रीकांत राणा की तरफ से जबाव दिया गया कि इसकी रंगाई पुताई और मरम्मत पर चालीस हजार रूपये का खर्चा आएगा। उच्च अधिकारियों के स्वीकृत किए जाने के बाद इसे सही कराया जाएगा। सचिन सोनी का कहना है कि जब बीओटी द्वारा मूर्ति का रख-रखाव किया जा रहा है तो नगर निगम क्यों फंड स्वीकृत किए जाने की बात कही जा रही है। इसमें जरूर कोई न कोई गोलमाल किया जा रहा है जिसकी जांच होनी चाहिए।

अधिकारी का कहना

अवर अभियंता श्रीकांत राणा ने बताया कि मूर्ति की रंगाई पुताई के लिए कुल 40,800 रुपये का खर्चा आएगा। जिसे की उच्च अधिकारियों से स्वकृति के पश्चात ठीक करा लिया जाएगा। अगर बीओटी पर ये मूर्ति दी हुई है तो इसके लिए टेंडर जारी करके इसे जल्द ही पूरा कराया जाएगा।

बीओटी के लिए क्या है शर्त

शहीदों की प्रतिमाओं के रख-रखाव की जिम्मेदारी बीओटी पर फर्म को दी जाती है। इसकी एवज में कंपनी अपनी लागत को वसूलने के लिए शहर के प्रमुख चौराहों पर एड पोल के जरिए कमाई करती है। अगर मूर्ति की स्थिति खराब है तो उसे बीओटी की फर्म को ही सही कराना होगा। अधिकारी की तरफ से इसके लिए एस्टीमेट तैयार किया गया है। लेकिन सवाल ये है कि जब जिम्मेदारी कंपनी की है तो इसके एस्टीमेट का काम और मरम्मत के लिए प्राईवेट फर्म को जिम्मेदार होना चाहिए।