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‘ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है’, 19 साल के पोते ने बोर्ड परीक्षा छोड़ दादी को दिया लिवर, पेश की अनोखी मिसाल

Ghaziabad News: आज के दौर का 'श्रवण कुमार'! जब डॉक्टरों ने कह दिया कि 'ट्रांसप्लांट ही आखिरी रास्ता है', तब 19 साल के इस पोते ने जो बलिदान दिया, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है। जानिए क्या है पूरी कहानी।

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Ghaziabad News: आज के स्वार्थी दौर में जहां लोग अक्सर अपने हितों को प्राथमिकता देते हैं, वहीं 19 वर्षीय आदित्य राज ने रिश्तों की एक नई इबारत लिखी है। अपनी दादी की जान बचाने के लिए आदित्य ने अपने करियर की परवाह किए बिना CBSE बोर्ड की परीक्षा छोड़ दी और दादी को अपना लिवर दान कर उन्हें मौत के मुंह से बाहर निकाल लाए। इस निस्वार्थ कदम की वजह से उन्हें आज के युग का 'श्रवण कुमार' कहा जा रहा है।

बिहार के हाजीपुर की रहने वाली 62 वर्षीय सुनीता देवी लिवर सिरोसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं। गाजियाबाद के मैक्स अस्पताल में डॉक्टरों ने साफ कर दिया था कि लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है। परिवार के कई सदस्यों के परीक्षण किए गए, लेकिन किसी का भी लिवर मैच नहीं हुआ। ऐसे नाजुक समय में आदित्य ने आगे बढ़कर अपना लिवर देने का फैसला किया। डॉक्टरों की जांच में वह पूरी तरह फिट पाए गए और परिवार की सहमति के बाद सर्जरी की तैयारी शुरू हुई।

'सफल रही सर्जरी'

मैक्स अस्पताल के विशेषज्ञों की टीम ने 2 फरवरी 2026 को यह जटिल ऑपरेशन किया। लिवर एवं पित्त विज्ञान केंद्र, मैक्स के समूह अध्यक्ष डॉ. सुभाष गुप्ता ने बताया कि सुनीता देवी लिवर सिरोसिस बीमारी से पीड़ित थीं। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजनों से बात कर लिवर ट्रांसप्लांट करने पर सहमति बनी। इसके बाद उनके 19 वर्षीय पोते आदित्य राज ने आगे आकर दादी को अपना लिवर दान देने की इच्छा जताई। फिर जांच के बाद आदित्य के लिवर का दायां हिस्सा (लगभग 710 ग्राम) उनकी दादी को प्रत्यारोपित किया गया। संयोग देखिए कि जिस दिन आदित्य को अस्पताल से छुट्टी मिलनी थी (17 फरवरी), उसी दिन से उनकी कक्षा 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं शुरू हो रही थीं। डॉक्टरों की सलाह और अपनी सेहत को प्राथमिकता देते हुए आदित्य ने बिना किसी मलाल के अपनी परीक्षा छोड़ दी, क्योंकि उनके लिए दादी की मुस्कान उनकी डिग्री से कहीं अधिक कीमती थी।

आदित्य के लिवर का दायां हिस्सा ट्रांसप्लांट किया गया

डॉ. राजेश डे ने बताया कि जीवित दाता लिवर ट्रांसप्लांट विधि के तहत आदित्य के लिवर का दायां हिस्सा ट्रांसप्लांट किया गया। 2 फरवरी को सफल प्रत्यारोपण हुआ और इसके बाद दो सप्ताह तक दोनों को कड़ी निगरानी में रखा गया। 17 फरवरी को आदित्य और उनकी दादी को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी। डॉ. राजेश ने बताया कि आदित्य के जीवन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।

'दादी से बेहद लगाव है'

अब दादी और पोता दोनों पूरी तरह स्वस्थ हैं। आदित्य के पिता, जो पेशे से एक किसान हैं, और पूरा परिवार आदित्य के इस साहसी निर्णय पर गर्व महसूस कर रहा है। आदित्य हाजीपुर के ही एक विद्यालय में 12वीं में पढ़ाई कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि लिवर डोनेट करने से आदित्य के भविष्य के स्वास्थ्य पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा। आदित्य का कहना है कि परीक्षाएं तो अगले साल भी दी जा सकती हैं, लेकिन दादी के साथ बिताने के लिए यह वक्त दोबारा लौटकर नहीं आता।